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महालेखाकार को हिसाब-किताब देने में स्वायत्त संस्थाओं की आनाकानी

नियमानुसार इन संस्थाओं को अपना सालाना लेखा जोखा तैयार कर महालेखाकार को ऑडिट के लिए देना है. इसका उद्देश्य संबंधित संस्थाओं के फंड के इस्तेमाल और उसकी उपयोगिता का पता लगाया जाना है. लेकिन इन संस्थाओं द्वारा अपना लेखा जोखा महालेखाकार को नहीं देने की वजह से इस संस्थाओं द्वारा किये गये खर्च की उपयोगिता का आकलन नहीं हो पा रहा है. कुछ संस्थाओं ने अपना लेखा-जोखा जमा किया लेकिन सक्षम पदाधिकारी के हस्ताक्षर के बिना जमा किये गये लेखा जोखा को महालेखाकार ने अस्वीकार कर दिया है.
 
LAGATAR NEWS

Ranchi : राज्य में कार्यरत स्वायत्त संस्थाएं महालेखाकार को अपना हिसाब किताब देने मेंआनाकानी कर रही है. महालेखाकार द्वारा लगातार की गयी कोशिशों के बावजूद राज्य सरकार मेंकार्यरत स्वायत्त संस्थाओं ने चार से 30 तक अपना लेखा जोखा महालेखाकार को नहीं दिया है. इन संस्थाओं में RINPAS , बिरसा कृषि विश्वविद्यालय सहित अन्य संस्थाओं का नाम शामिल है.

राज्य में कुल 34 स्वायत्त संस्थाएं कार्यरत हैं. नियमानुसार इन संस्थाओं को अपना सालाना लेखाजोखा तैयार कर महालेखाकार को ऑडिट के लिए देना है. इसका उद्देश्य संबंधित संस्थाओं केफंड के इस्तेमाल और उसकी उपयोगिता का पता लगाया जाना है. लेकिन इन संस्थाओं द्वाराअपना लेखा जोखा महालेखाकार को नहीं देने की वजह से इस संस्थाओं द्वारा किये गये खर्च कीउपयोगिता का आकलन नहीं हो पा रहा है. कुछ संस्थाओं ने अपना लेखा-जोखा जमा कियालेकिन सक्षम पदाधिकारी के हस्ताक्षर के बिना जमा किये गये लेखा जोखा को महालेखाकार नेअस्वीकार कर दिया है.

 

महालेखाकार सूत्रों के अनुसार सबसे लंबे समय से अपना लेखा जोखा नहीं देने वालों में RINPAS (Ranchi Institute of Neuro-psychiatry and Allied Sciences) का नाम है. इस संस्थाने महालेखाकार को पिछले 30 वर्षों से अपना लेखा जोखा नहीं दिया है. इस मामले में स्वास्थ्यविभाग से पत्रचार का दौर चल रहा है.

 

JREDA (Jharkhand Renewable Energy Development Agency) ने भी पिछले 22 साल से अपना लेखा जोखा महालेखाकार को ऑडिट के लिए नहीं दिया है. JREDA का गठनराज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2001-02 में किया था. इस संस्था ने अपने गठन के बाद से ही अपनलेखा जोखा महालेखाकार को नहीं दिया है. JREDA को गठन के बाद अब तक उसमें करोड़ोंरूपये के घोटाले का पर्दाफाश हो चुका है. इसमें संस्था के बड़े अधिकारियों की संलिप्त होने काआरोप है. राज्य सरकार की एजेंसियां इन घोटालों की जांच कर रही है.

 

झारखंड राज्य आवास बोर्ड ने भी अपने गठन के बाद से अपना लेखा जोखा महालेखाकार को नहींदिया है. आवास बोर्ड मे वित्तीय वर्ष 2002-02 से ही अपना लेखा जोखा महालेखाकार को नहींदिया है. यानी आवास बोर्ड ने 23 साल को लेखा जोखा महालेखाकार को नहीं दिया है. राज्यआवास बोर्ड अपने गठन के बाद से आवास आवंटन, जमीन आवंटन, सहित अन्य प्रकार कीअनियमितताओं को लेकर चर्चित रहा है.

 

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय ने भी अपना लेखा जोखा पिछले 17 सालों से महालेखाकार को नहींदिया है. वित्तीय वर्ष 2007-08 से 2023-24 तक की अवधि विश्वविद्यालय ने सिर्फ दो वित्तीयवर्षों (2007-09) का लेखा जोखा महालेखाकार को दिया था. लेकिन निर्धारित अकाउंटिंग कीनिर्धारित प्रक्रिया के लेखा जोखा जमा नहीं करने की वजह से महालेखाकार ने इसे अस्वीकार करदिया है.

 

राज्य में बिजली मंहगी होगी या सस्ती इसका फैसला करने वाली संस्था JSERC (Jharkhand Electricity Regulatory Commission) ने भी अपना लेखा जोखा पिछले 13 साल से नहींदिया है. इस संस्था का गठन अगस्त 2009 में किया गया था. JSERC ने वित्तीय वर्ष 2012-13 से अपना लेखा जोखा नहीं दिया है. लेखा जोखा जमा करने के मुद्दे पर महालेखाकार औरकमिशन के आधिकारियों के बीच एक बार बैठक हो चुकी है.  JRERA( Jharkhand Real Estate Regulatory Authority) ने भी अपने गठन के बाद अपना लेखा जोखा महालेखाकारको नहीं दिया है. सरकार ने व्यावसायिक और आवासीय भवनों के निर्माण के दौरान नियमकानून पर नजर रखने के लए इस संस्था का गठन नवंबर 2018 में किया था. लेकिन इस संस्थाने भी अपना लेखा जोखा महालेखाकार को नहीं दिया है.

 

अपना लेखा जोखा देने में आनाकानी करने वाली संस्थाएं

स्वायत्त संस्था का नाम           कितने साल का   हिसाब नहीं दिया
रिनपास   30 साल/ 1994-29024 तक
जरेडा     22 साल/ 2002-24 तक
राज्य आवास बोर्ड 23 साल/ 2001-24 तक
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय 17 साल/ 2007-24 तक
इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमिशन 13 साल/ 2012-25 तक
कैम्पा   15 साल/ 2010-24 तक
स्टेट हाईवे ऑथरिटी 4 साल/ 2022-25 तक
डीएमएफटी   25 साल/ 2001-25 तक
झरेरा  7 साल/  2019-25 तक

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