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सुप्रसिद्ध चित्रकार उज्ज्वल घोष बीमार, मदद के लिए लगा रहे गुहार

किडनी के इलाज में हर माह खर्च हो रहा 80 हजार, किसी मसीहा का कर रहे इंतजार राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगा चुके हैं कई आर्ट गैलरी, मिल चुका है सैकड़ों पुरस्कार Amarnath Pathak Hazaribagh : सुप्रसिद्ध चित्रकार उज्ज्वल घोष पिछले कई माह से बीमार हैं. वह किडनी रोड से पीड़ित हैं और रांची के डॉ एके वैद्य से उनका इलाज चल रहा है. सप्ताह में दो दिन उन्हें डायलिसिस की दरकार पड़ रही है. घर में कमाने वाले में एकमात्र सदस्य उनकी पत्नी भावना घोष हैं. वह हॉलीक्रॉस स्कूल में शिक्षिका हैं. उनका इकलौता बेटा फिलहाल प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहा है. उज्ज्वल घोष ने मदद के लिए लोगों से गुहार लगाई है. हजारीबाग के मटवारी स्थित जागो गली निवास में जब ‘शुभम संदेश’ उनकी सुध लेने के लिए उनके घर पहुंचा, तो बीमार हालत में अपनी परेशानी बयां की. उन्होंने बताया कि इलाज कराने के लिए माहभर में करीब 80 हजार रुपए जुटाने पड़ते हैं. शरीर कमजोर पड़ गया है और पहले की तरह पेंटिंग स्कूल भी नहीं चला पा रहे हैं. इसे भी पढ़ें :बहरागोड़ा">https://lagatar.in/rahul-gandhi-will-come-to-ranchi-rally-in-april-state-congress-leadership-mobilized/">बहरागोड़ा

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देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत कर चुके हैं कई जीवंत और संजीदा पेंटिंग

पत्नी और बेटे की मदद से उज्ज्वल घोष बतौर निदेशक उपेंद्र महारथी स्कूल ऑफ पेंटिंग संचालित कर रहे हैं. उन्होंने पेंटिंग का यह स्कूल वर्ष 1992 में शुरू किया था. उन्होंने फॉल्क, सोहराय कला, आदिवासियों के रहन-सहन समेत प्रकृति से जुड़ी एक से बढ़कर एक संजीदा, जीवंत और संदेशपरक पेंटिंग देश-दुनिया के समक्ष प्रस्तुत किया. वह पेंटिंग में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैकड़ों पुरस्कारों से नवाजे गए. उन्होंने बुद्ध पर आधारित कई मशहूर पेंटिंग बनाई. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/03/bbbb-2-1.jpg"

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चार साल में लिख डाली फॉल्क, ट्रेडिशन आर्ट और क्राफ्ट्स ऑफ झारखंड पर पुस्तक

बीमार हालत में भी मशहूर चित्रकार उज्ज्वल घोष की न कूची रूकी और न कलम. उन्होंने अपने कला गुरु उपेंद्र महारथी के नाम समर्पित एक पुस्तक लिखी है. इस पुस्तक को लिखने में उन्हें चार साल लगे. यह पुस्तक उन्होंने फॉल्क, ट्रेडिशन आर्ट और क्राफ्ट्स ऑफ झारखंड पर लिखी है. इसमें बौद्ध धर्म का प्रभाव, वेणुशिल्प, , बिहार की लोक कला, जापान की यात्रा और यूनिस्को सेमिनार, टेक्सटाइल डिजाइन, महारथी का व्यक्तित्व समेत कई रचनाओं को समाहित किया गया है. वह बेसब्री से इस पुस्तक के प्रकाशन की प्रतीक्षा कर रहे हैं. इसके लिए प्रकाशक का भी इंतजार कर रहे हैं. इसे भी पढ़ें :जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-azad-bhuiyan-absconding-in-burmamines-firing-case-arrested/">जमशेदपुर

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लगा चुके हैं कई कैंप, पा चुके हैं कई अवार्ड

नामचीन चित्रकार उज्ज्वल घोष ने अब तक हजारीबाग, देवघर, रांची, जमशेदपुर, मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, अहमदाबाद, पटना, उज्जैन, ग्वालियर, ओडिशा समेत कई जगहों पर पेंटिंग कैंप कर चुके हैं. वह राष्ट्रीय सद्भावना पुरस्कार, कला समुद्र सम्मान, कला गुरु बटेश्वरनाथ श्रीवास्तव स्मृति सम्मान, लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड आदि से नवाजे जा चुके हैं. फिलहाल वह शैल लेख झारखंड और शिल्पकला परिषद के सचिव का दायित्व निभा रहे हैं. [wpse_comments_template]

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