- उत्तर प्रदेश में SIR में 84.3 लाख नाम जोड़े गए, लेकिन सार्वजनिक Form 6 सिर्फ 71.38 लाख.
- प्री-ड्राफ्ट 16.18 लाख आवेदनों का कोई विवरण निर्वाचन आयोग के वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं.
Lagatar Desk
खोजी पोर्टल द रिपोर्टर्स कलेक्टिव ने 6 अक्टूबर 2026 को एक रिपोर्ट प्रकाशित किया है. रिपोर्ट में दावा किया है कि उत्तर प्रदेश की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में चुनाव आयोग ने 16.18 लाख मतदाताओं की पहचान और Form 6 आवेदन-विवरण सार्वजनिक नहीं किए, जबकि नियम ऐसे हर आवेदन को मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर रखने की बात कहते हैं. रिपोर्ट आयुषी कर और सुमेधा मित्तल की है, जिसका संपादन नितिन सेठी ने की है.
रिपोर्ट क्या कहती है
रिपोर्टर्स कलेक्टिव ने तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से उत्तर प्रदेश CEO वेबसाइट पर उपलब्ध सभी Form 6 आवेदनों को डाउनलोड कर विश्लेषण किया. उनके मुताबिक आयोग मतदाता केवल Form 6 के जरिए जोड़ सकता है, इसलिए जोड़े गए लोगों की संख्या आवेदनों से अधिक नहीं होनी चाहिए और हर आवेदन का विवरण (फोटो के बिना) पोलिंग स्टेशन स्तर तक सार्वजनिक होना चाहिए.
अंतर समझाने के लिए उन्होंने प्रेस रिलीज खंगालीं. 7 मार्च 2026 की रिलीज में लिखा था कि ड्राफ्ट सूची से पहले 16.18 लाख लोगों ने Form 6 जमा किया था. रिपोर्ट का दावा है कि इन आवेदनों के नाम, विधानसभा, बूथ या सत्यापन का कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड नहीं मिला. 6 जनवरी 2026 से पहले के Form 6 सार्वजनिक डेटा में नहीं दिखे.
रिपोर्ट की खास बातें
| सार्वजनिक Form 6 आवेदन | 71.38 लाख (ज्यादातर ड्राफ्ट से कटे नामों की वापसी के लिए) |
| अंतिम सूची में जोड़े गए मतदाता | 84.3 लाख. |
| आंकड़ों का अंतर | 12.92 लाख. |
| 7 मार्च 2026 की प्रेस रिलीज में प्री-ड्राफ्ट आवेदन | 16.18 लाख (इनका विवरण वेबसाइट पर नहीं.) |
| SIR से पहले रोल | 15.44 करोड़ |
| ड्राफ्ट में कटे | 2.89 करोड़ |
| अंतिम रोल करीब | 13.40 करोड़ |
| कुल कमी | 2.04 करोड़. |
| रिपोर्ट का अनुमानित मंजूरी दर (मान्यता मानकर) | 96% (अन्य राज्यों में सामान्य प्रवृत्ति 60–70% बताई गई.) |
रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2025 के आसपास फ्रीज रोल में 15.44 करोड़ मतदाता थे. 6 जनवरी 2026 की ड्राफ्ट सूची में 2.89 करोड़ नाम काटे गए. अप्रैल 2026 की अंतिम सूची में कुल मतदाता करीब 13.40 करोड़ रह गए और ड्राफ्ट के मुकाबले 84.3 लाख नाम वापस जुड़े. यानी बड़ी कटाई के बीच जोड़ का यह हिस्सा विवाद का केंद्र बना.
रिपोर्ट समाचारों का हवाला देते हुए कहती है कि ड्राफ्ट के बाद नाम कटने पर भाजपा नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं को हर बूथ पर कम से कम 200 मतदाता जोड़ने का निर्देश दिया था. फरवरी में CEO ने कहा था कि Form 6 का बड़ा हिस्सा गलत कटे नामों की वापसी का है.
आयोग का पक्ष
रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश निर्वाचन विभाग के CEO नवदीप रिनवा से फोन पर बात करने पर उन्होंने कहा कि वे शंकाएं सुलझाने की कंसल्टेंसी नहीं देते और कॉल काट दी. बाद में कहा कि उनके डेटा में कोई मिसमैच नहीं है. चुनाव आयोग और CEO को भेजे विस्तृत सवालों का खबर प्रकाशन तक जवाब नहीं मिला. रिपोर्ट खुद मानती है कि 16.18 लाख कुल, 13.40 करोड़ के मुकाबले छोटा आंकड़ा है, लेकिन असमान बंटवारे पर कुछ सीटों या बूथों पर असर पड़ सकता है. यह दावा अभी स्वतंत्र सत्यापन और आयोग के स्पष्टीकरण का विषय है.