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2025 तक टीबी मुक्त का संकल्प, मरीजों को तीन महीने से दवा नहीं

  • टीबी हारेगा-देश जीतेगा का अभियान कैसे होगा सफल
  • दो साल में एक भी नए संक्रमित मरीज की तलाश नहीं
  • दो हजार से अधिक पुराने मरीजों को दवा नहीं मिलने से बढ़ने लगी परेशानी Raja Gupta

Dhanbad : 2025 तक धनबाद ही नहीं बल्कि पूरे भारत को टीबी से मुक्त करने का संकल्प लिया गया है. टीबी की बीमारी इतनी खतरनाक है कि एक से दो सप्ताह तक मरीज को जरूरी दवाईयां नहीं मिली तो वह छह माह पीछे चला जाता है और गंभीर लक्ष्ण दिखने लगते हैं. लगातार खांसी होना, बुखार आना, छाती में दर्द, वजन घटना, भूख में कमीं, बलगम के साथ फिर से खून निकलना, किसी किसी को खून की उल्टी होने लगता है. यही वजह है कि चिकित्सक भी मरीज को सलाह देते हैं कि दवाईयां छूटनी नहीं चाहिए. जबकि सरकारी व्यवस्था इतनी लचर है कि पिछले तीन महीने से डॉट्स प्लस सेंटर व टीबी सेंटर पर मरीजों को दवा नहीं मिल रही है. पुराना मरीज धनबाद में 3300 से आसपास हैं और नए मरीजों की संख्या हर साल 300 बढ़ रही है. सूत्रों के अनुसार वर्ष 2017 में टीबी हारेगा-देश जीतेगा का संकल्प लिया गया. जिसे 2025 तक भारत से पूरी तरह टीबी मुक्त करने का अभियान चलाया गया. मरीजों का कहना है कि शहरी हो या फिर ग्रामीण क्षेत्र, कहीं भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी मुक्त अभियान नहीं देखा गया. न तो पुराने मरीज के वर्तमान स्थिति की जानकारी ली गई और न ही नए मरीज की तलाश की गई. ऐसे में टीबी मुक्त का संकल्प पूरा कैसे होगा.

हर साल बढ़ रहे 300 मरीज, नहीं चल रहा जागरुकता अभियान

जबकि हर साल लगभग 300 नए मरीज जागरुकता के अभाव में परिवार के सदस्य व संक्रमित मरीज के संपर्क में रहनेवाले इलाके के लोग संक्रमण के शिकार हो रहे हैं. टीबी हारेगा, देश जीतेगा का नारा और अभियान कागजों व पोस्टर तक ही सीमित है. जिला यक्ष्मा पदाधिकारी और यक्ष्मा विभाग के चिकित्सक व कर्मी को अभियान व मरीजों से कोई लेना देना नहीं रह गया है. धनबाद जिला के धनबाद, झरिया, तोपचांची, निरसा, टुंडी, बाघमारा व बलियापुर आदि अन्य प्रखंडों के दर्जनों इलाकों व गांवों के लोग टीबी के शिकार हैं और दवाईयां ले रहे हैं. आर्थिक रूप से कमजोर लोग, जो सरकारी दवा पर ही निर्भर है, उन्हें काफी परेशानी हो रही है. हर दो-चार के बाद डॉट्स प्लस सेंटर पर आकर बगैर दवा लिए घर लौट जा रहे हैं. वहीं कई लोग कर्ज लेकर भी दवा खरीद रहे हैं. गरीब व मजदूर तबके के लोगों के घरों में जो लोग टीबी के मरीज हैं उन्हें काफी परेशानी हो रही है.

यही हाल रहा तो कभी नहीं होगा टीबी मुक्त धनबाद

जानकारों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग इसी तरह उदासीन रहा तो 2025 तो क्या कभी भी धनबाद टीबी मुक्त नहीं होगा. कई मरीज स्वास्थ्य मंत्री व जिला यक्ष्मा पदाधिकारी को पत्र लिखकर थक चुके हैं. कई लोग ऑनलाइन एक्स पर भी ट्वीट कर चुके हैं. उसके बावजूद टीबी की दवाईयां धनबाद नहीं पहुंच रही है. जिला डॉट्स प्लस सेंटर के कर्मचारी कहते हैं कि मुख्यालय से दवाईयां आएगी तो मिल जाएगी. जब मरीज दवा लेने जाते हैं तो कर्मी कहते हैं कि अभी दवा नहीं है, एक-दो दिन में आ जाएगी. चिकित्सक कहते हैं कि एचआईवी संक्रमित मरीजों को टीबी होने और समय पर दवा नहीं मिलने से सबसे अधिक परेशानी होती है. इसे भी पढ़ें : क्रिकेट">https://lagatar.in/god-of-cricket-remembered-childhood/">क्रिकेट

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