तीन मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने दिया था निर्णय
रिटायर्ड जस्टिस ने कहा है कि सीवीके राव V/S दत्तू भसकरा -1964 में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 9 (A) के तहत माइनिंग लीज का मामला सप्लाई ऑफ गुड्स बिजनेस के तहत नहीं आता. 2001 में करतार सिंह भदाना V/S हरि सिंह नालवा और अन्य और 2006 में श्रीकांत V/S बसंत राव और अन्य मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह का निर्णय दिया था.माइंस लीज का मामला इसमें नहीं आता
उन्होंने कहा कि सामान्य बातों में समझें तो धारा 9 A के तहत सभी तरह के मामलों में किसी भी व्यक्ति को उसके पद से बर्खास्त नहीं किया जा सकता. केवल सप्लाई ऑफ गुड्स और सरकारी कामों का उपयोग करने में ही ऐसा किया जा सकता है. माइंस लीज का मामला इसमें नहीं आता. पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पहले ही अपने चुनावी हलाफनामा में इस बात का जिक्र किया है कि उनके नाम से एक माइंस लीज पर है, जिसे उन्होंने रिन्यूअल के लिए भेजी हुई है. ऐसे में तो कोई आपराधिक मामला बनता ही नहीं. रिटायर्ड जस्टिस ने कहा, किसी तरह के कोई निर्णय लेने से पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को भी देखा जाना जरूरी है. इसे भी पढ़ें - इंटरमीडिएट">https://lagatar.in/students-deprived-of-intermediate-exam-will-be-able-to-give-examination-high-court-gave-instructions-to-jac-know-the-matter/">इंटरमीडिएटइग्जाम से वंचित छात्र दे पाएंगे परीक्षा, हाईकोर्ट ने JAC को दिया निर्देश, जानें मामला [wpse_comments_template]

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