Ranchi: वन विभाग में अफसरों की कमी के नाम पर सेवा विस्तार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हास्यास्पद करार दिया है. हाईकोर्ट ने भी रिटायटमेंट के बाद रिक्त पदों को भरने के बदले उन्हें अवधि विस्तार देने को सही नहीं माना है. इसके बावजूद वन विभाग में 10 से अधिक सहायक वन संरक्षक (ACF) रिटायटमेंट के बाद काम कर रहे हैं.
राज्य के तत्कालीन वन सचिव एल खियांग्ते ने रिटायर्ड ACF को अवधि विस्तार के लिए एक प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री को भेजा था. इसमें उन्होंने लिखा था कि राज्य में ACF के कुल 156 स्वीकृत पद हैं. इसके विरूद्ध सिर्फ 24 ACF ही कार्यरत हैं. दिसंबर 2023 में रिटायरमेंट के बाद विभाग में सिर्फ 19 ACF ही बचेंगे. उन्होंने लिखा कि सहायक वन संरक्षकों की नियुक्ति नियमावली तैयार करने का काम अंतिम चरण में है. नियमावली के अधिसूचित होने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने और ट्रेनिंग में तीन-चार साल लगेगा. संविदा के आधार पर नियुक्ति से वांछित सफलता नहीं मिली. इसलिए सहायक वन संरक्षकों को तीन साल का अवधि विस्तार देना बेहतर होगा.

एल खियांग्ते के प्रस्ताव पर तत्कालीन मुख्य सचिव की आपत्ति
तत्कालीन वन सचिव का यह प्रस्ताव जब तत्कालीन मुख्य सचिव सुखदेव सिंह के पास पहुंचा तो उन्होंने इस पर आपत्ति की. उन्होंने लिखा कि 23 वर्षो में राज्य सेवा के किसी भी पदाधिकारी को सेवा विस्तार नहीं दिया गया है. अतः नयी परंपरा की शुरूआत करना बेहतर नहीं होगा. इस टिप्पणी के साथ ही उन्होंने एल खियांग्ते के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया. तत्कालीन मुख्य सचिव द्वारा आपत्ति के बाद यह मामला मुख्यमंत्री के पास अंतिम निर्णय के लिए भेजा गया.

संविदा या अवधि विस्तार पर मुख्यमंत्री की टिप्पणी
मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की समीक्षा के बाद एल खियांग्ते द्वारा दिये गये प्रस्ताव को हास्यास्पद करार दिया. साथ ही यह सवाल किया कि क्या किसी सेवा की नियमावली गठन और उसके आधार पर नियुक्ति एवं पदस्थापन में चार साल का समय लगेगा. उन्होंने वन क्षेत्र पदाधिकारी के पद पर संविदा के आधार पर नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टिकोण से अनुचित माना.

सेवा विस्तार का उदाहरण
हाईकोर्ट ने ACF अविनाश कुमार और अभय कुमार सिन्हा द्वारा अवधि विस्तार का निर्देश देने की मांग वाली याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि कोर्ट किसी रिटायर्ड कर्मचारी को सेवा विस्तार देने का निर्देश नहीं दे सकता है. यह रिटायर्ड कर्मचारी का अधिकार भी नहीं है. अविनाश कुमार और अभय कुमार सिन्हा वर्ष 2024 में रिटायर हुए थे. इन्हें एक साल के अवधि विस्तार का लाभ दिया गया था.
दूसरे अवधि विस्तार (1-7-2025 से 30-6-2026 तक) का मामला सरकार के पास विचाराधीन था. सरकार द्वारा कोई फैसला नहीं लेने की वजह से दोनों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कोर्ट से यह अनुरोध किया कि वह सरकार को अवधि विस्तार के लिए निर्देश दे. सुनवाई के बाद न्यायाधीश आनंदा सेन ने याचिका खारिज कर दी.
प्रधान मुख्य वन संरक्षक के ओएसडी ओम प्रकाश(भारतीय वन सेवा) तो सेवा विस्तार की अवधि समाप्त होने के बाद भी काम कर रहे थे. उन्हें दिया गया अवधि विस्तार 17-7-2025 को समाप्त हो गया था. प्रधान मुख्य वन संरक्षक द्वारा बार-बार अवधि विस्तार का अनुरोध किया जा रहा था. सरकार के स्तर से इन पत्रों का जवाब 13 अगस्त 2025 को प्रधान मुख्य वन संरक्षक को भेजा गय़ा. इसमें ओम प्रकाश से किसी तरह का काम लेने पर पाबंदी लगायी गयी.
साथ ही प्रधान मुख्य वन संरक्षक को यह याद दिलाया गया कि उन्हें संविदा पर नियुक्ति के मामले में मुख्यमंत्री की राय की जानकारी दे गयी थी. मुख्यमंत्री ने यह टिप्पणी कि है कि बिना किसी चयन प्रक्रिया के सेवानिवृत हो रहे अधिकारियों को इच्छानुसार संविदा पर रखने या सेवा विस्तार का प्रस्ताव विभिन्न विभागों से प्राप्त हो रहे हैं,जो नियम संगत नहीं है. इस प्रक्रिया को हतोत्साहित करने की आवश्यकता है.
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