Search

 
 
 

तिरंगे की ललक में सात समंदर पार लंदन से लौटे वतन

 
Amarnath Pathak  Ranchi: तिरंगे की ललक में एक डॉक्टर सात समंदर पार लंदन से अपने वतन भारत लौट आए. इतना ही नहीं, एक अस्पताल से दो माह के करार को भी उन्होंने ठुकरा दिया. यहां आकर गणतंत्र दिवस पर झंडा फहराया और तिरंगे को सलामी दी. बच्चों को राष्ट्रप्रेम का पाठ पढ़ाया और संविधान के महत्व को बताया. नेतरहाट से पढ़ाई कर पटना से एमबीबीएस की डिग्री लेकर लंदन में स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारतीय प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं. [caption id="attachment_539130" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/dr-gyaneshwari-pd-1_79.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> डॉ ज्ञानेश्वरी प्रसाद की तस्वीर[/caption] सात समुंदर पार रहने वाले यह अप्रवासी भारतीय डॉ. ज्ञानेश्वरी प्रसाद हैं, जिनका दिल देश के लिए धड़कता है. तभी तो गणतंत्र दिवस के अवसर पर हजारीबाग शिवदयालनगर स्थित अपने आवास तिरंगा फहराने के लिए पहुंच गए. दरअसल अप्रवासी भारतीय डॉ. ज्ञानेश्वरी प्रसाद कटकमदाग के सुल्ताना में शोभा ज्ञान पब्लिक स्कूल का संचालन करते हैं. वर्ष 2016 में उन्होंने स्कूल की स्थापना की थी. स्कूल का उद्देश्य गरीब किसान और मजदूरों के बच्चों को कम से कम फीस में अच्छी शिक्षा देना है. इसी उद्देश्य से पिछले कई सालों से स्कूल चल रहा है. इसे पढ़ें- कोडरमा">https://lagatar.in/koderma-teenager-dies-after-falling-in-immersion-procession-one-person-commits-suicide-in-second-incident/">कोडरमा

: विसर्जन जुलूस में गिरने से किशोर की मौत, दूसरी घटना में एक शख्स ने की खुदकुशी
कोरोना काल होने के कारण दो वर्षों से स्कूल परिसर में दोनों राष्ट्रीय त्योहार गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाया जा सका. ऐसे में छात्रों के साथ गणतंत्र दिवस मनाने के लिए सात समुंदर पार से स्कूल के संस्थापक स्वयं हजारीबाग पहुंच गए. उन्होंने बच्चों के साथ उल्लास और उत्साह से समारोह मनाया और बच्चों को पाठ भी पढ़ाया. गणतंत्र दिवस के अवसर पर स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया. पूरे कार्यक्रम में बेटियों को प्रोत्साहित करने के लिए कई कार्यक्रम किए गए. आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण भी उपस्थित हुए. ग्रामीणों को स्कूल के संस्थापक ने प्रेरित भी किया कि वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दें . कभी भी बेटा और बेटी में भेदभाव नहीं करें. आज बेटी ऐसा कोई काम नहीं, जो नहीं कर रही है. कई जगह तो बेटियां ही माता-पिता के लिए बेटे की तरह खड़ी हो रही हैं. इसे भी पढ़ें- एलपीएन">https://lagatar.in/lpn-shahdev-memorial-cricket-tournament-chandwa-fighters-team-became-the-winner/">एलपीएन

 शाहदेव मेमोरियल क्रिकेट टूर्नामेंट : चंदवा फाइटर की टीम बनी व‍िजेता 
[wpse_comments_template]
Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही