NewDelhi : हमारे बीच मतभेद हैं लेकिन ऐसे नहीं, जिन्हें टकराव कहा जाये. कुछ लोग जो भारत की तरक्की नहीं देख सकते, वो हमारे बीच गफलत पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका को एक साथ मिलकर चलना होगा. लॉ मिनिस्टर किरेन रिजिजू न्यायपालिका से सरकार के संबंधों को लेकर असम में बोल रहे थे. गुवाहाटी हाईकोर्ट के प्लेटिनम जुबली समारोह में सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ भी मौजूद थे. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, वे सरकार और जूडिशरी के बीच संबंध संविधान में बताये गये प्रावधानों के अनुसार चलेंगे. साथ ही कहा कि देश के लोगों का विश्वास और आस्था ऐसी न्यायपालिका में है, जो न केवल स्वतंत्र हो बल्कि तीखे तेवर वाली हो.
बार और कोर्ट एक दूसरे के बगैर काम नहीं कर सकते
जान लें कि सीजेआई चंद्रचूड़ चाहते हैं कि तीनों स्तंभों के बीच के संबंध सौहाद्रपूर्ण रहे. उनका कहना था कि न्यायपालिका और सरकार के बीच के मतभेद लोकतंत्र का एक हिस्सा ही तो है. उदाहरण दिया कि जैसे बार और कोर्ट एक दूसरे के बगैर काम नहीं कर सकते. दोनों एक सिक्के के ही दो पहलू हैं. दोनों के साथ आये बगैर न्याय नहीं दिया जा सकता है. जान लें कि कॉलेजियम के मसले पर सरकार और SC के बीच पिछले कुछ अरसे से तनातनी बनी हुई है. जजों की नियुक्ति का काम सरकार का है
कानून मंत्री और उप राष्ट्रपति ओपी धनखड़ सार्वजनिक तौर पर कई बार कॉलेजियम सिस्टम की आलोचना कर चुके हैं. दोनों का मानना है कि जजों की नियुक्ति का काम सरकार का है. संविधान में यह व्यवस्था दी है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट खुद को संविधान से ऊपर मानकर काम कर रहा है. बता दें कि इसे लेकर बॉम्बे लायर्स एसोसिएशन ने कानून मंत्री और उप राष्ट्रपति को बर्खास्त करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. हाईकोर्ट ने उसे रिजेक्ट कर दिया था. बाद में एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन दायर की. अभी यह सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. सीजेआई चंद्रचूड़ का कहना है कि जजों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम से बेहतर कोई व्यवस्था नहीं है। उनका मानना है कि कोई भी सिस्टम बेदाग हो. यह संभव नहीं है, लेकिन मौजूदा दौर में जजों की नियुक्ति के लिए यही सिस्टम सबसे ज्यादा कारगर है. [wpse_comments_template]
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