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रिम्स, ब्लड, एंबुलेंस से लेकर बर्न यूनिट तक...झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था के कई मुद्दे हाईकोर्ट में

Ranchi :  रिम्स से जुड़ा प्रमुख मामला W.P. (PIL) No. 4736 of 2018, ज्योति शर्मा बनाम झारखंड सरकार है. इसमें रिम्स की बुनियादी सुविधाओं, कर्मचारियों, उपकरणों, जांच व्यवस्था, परिसर और जमीन से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं.
 
स्वास्थ्य व्यवस्था के मामले हाईकोर्ट में

Ranchi :  झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े कई मामले में झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है. रिम्स की बुनियादी सुविधाओं और जमीन से लेकर खून की उपलब्धता, कथित संक्रमित खून चढ़ाने, जलने वाले मरीजों के इलाज, 108 एंबुलेंस और जैव चिकित्सा कचरे तक के मामले अदालत में हैं.

 

अलग-अलग जनहित याचिकाओं और आपराधिक मामलों में हाईकोर्ट ने सरकार और संबंधित संस्थानों से रिपोर्ट मांगी है और कई मामलों में व्यवस्था को लेकर निर्देश भी दिए हैं. (झारखंड की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...)

 

रिम्स की व्यवस्था और जमीन का मामला

रिम्स से जुड़ा प्रमुख मामला W.P. (PIL) No. 4736 of 2018, ज्योति शर्मा बनाम झारखंड सरकार है. इसमें रिम्स की बुनियादी सुविधाओं, कर्मचारियों, उपकरणों, जांच व्यवस्था, परिसर और जमीन से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं.

 

नवंबर 2025 में हाईकोर्ट ने रिम्स परिसर में अतिक्रमण और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी मांगी. इसके बाद 26 और 27 नवंबर 2025 को झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव ने रिम्स का निरीक्षण किया. निरीक्षण रिपोर्ट में अलग-अलग मौजा की जमीन और अतिक्रमण की स्थिति की जानकारी दी गई.

 

सुनवाई के दौरान रिम्स की जांच व्यवस्था पर भी जानकारी मांगी गई. अस्पताल की ओर से बताया गया कि पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री जैसी कई जांच रिम्स में हो रही है. एमआरआई, मैमोग्राफी, पोर्टेबल सीटी स्कैन और पेट स्कैन जैसे उपकरणों की खरीद प्रक्रिया की भी जानकारी अदालत को दी गई.

 

खून की व्यवस्था से जुड़े कई मामले

राज्य में खून की उपलब्धता और रक्तदान व्यवस्था से जुड़े कई मामले हाईकोर्ट पहुंचे हैं. इनमें W.P. (PIL) No. 6062 of 2025, 2971 of 2020, 2413 of 2021 और 4688 of 2025 शामिल हैं. इन मामलों में राष्ट्रीय रक्त नीति के तहत स्वैच्छिक रक्तदान और मरीजों को जरूरत के समय खून उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सुनवाई हुई. अदालत के सामने यह मुद्दा भी आया कि कई बार मरीज के परिजनों को खुद रक्तदाता की व्यवस्था करनी पड़ती है.

 

दिसंबर 2025 के आदेश में शत-प्रतिशत स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने, हर जिले में रक्त के अलग-अलग घटक तैयार करने की सुविधा, शिकायत के लिए अलग व्यवस्था और रक्त भंडारों के नियमित निरीक्षण से जुड़े निर्देश दिए गए.  खून की उपलब्धता की जानकारी के लिए मोबाइल ऐप, वेबसाइट और टोल फ्री नंबर की व्यवस्था पर भी निर्देश दिए गए. इन निर्देशों के पालन के लिए 20 मार्च 2026 की तारीख तय की गई थी.

 

चाईबासा में कथित संक्रमित खून का मामला

चाईबासा में पांच नाबालिग थैलेसीमिया मरीजों को कथित तौर पर एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने का आरोप भी हाईकोर्ट पहुंचा. मामला W.P. (Cr.) No. 50 of 2026 के रूप में दर्ज हुआ.  परिजनों की ओर से प्राथमिकी दर्ज कर जांच की मांग की गई थी.

 

4 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट ने प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया. इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया. अप्रैल 2026 में अदालत ने जांच की प्रगति की रिपोर्ट भी मांगी. इस मामले में खून की जांच, रक्त चढ़ाने की प्रक्रिया और कथित संक्रमण से जुड़े तथ्यों की जांच का मुद्दा सामने आया है.

 

जलने वाले मरीजों के इलाज की व्यवस्था

जलने वाले मरीजों के इलाज की व्यवस्था से जुड़ा मामला W.P. (PIL) No. 920 of 2021 ओंकार विश्वकर्मा बनाम झारखंड सरकार है. यह मामला हजारीबाग में मिट्टी तेल से हुई आग की घटना और इलाज की व्यवस्था से जुड़े सवालों से शुरू हुआ था.

 

बाद में इसमें पूरे राज्य में जलने वाले मरीजों के इलाज की स्थिति, बर्न यूनिट, प्रशिक्षित डॉक्टर और कर्मचारी, दवाओं तथा जरूरी उपकरणों की उपलब्धता जैसे मुद्दे शामिल हुए. 1 अप्रैल 2026 के फैसले में हाईकोर्ट ने राज्य में जलने वाले मरीजों के इलाज के लिए अलग और व्यवस्थित सुविधा से जुड़े निर्देश दिए.

 

108 एंबुलेंस सेवा का मामला

108 एंबुलेंस सेवा से जुड़ी सुनवाई में अगस्त 2025 में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि राज्य में 510 एंबुलेंस हैं. इनमें करीब 430 चालू थीं, जबकि 57 मरम्मत में थीं. सरकार ने 30 नई उन्नत जीवन रक्षक एंबुलेंस लाने की योजना की जानकारी भी दी थी. मामले में एंबुलेंस चालकों, सेवा में रुकावट और आपात स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने से जुड़े मुद्दे उठे.

 

रांची सदर अस्पताल से जुड़े एक अलग स्वत: संज्ञान मामले में एक गर्भवती महिला को यातायात जाम और गलत तरीके से वाहन खड़े होने के कारण अस्पताल पहुंचने में परेशानी हुई थी. इसके बाद हाईकोर्ट ने यातायात पुलिस अधीक्षक और रांची सिविल सर्जन को गंभीर मरीजों और एंबुलेंस के लिए रास्ता सुगम रखने के निर्देश दिए.

 

जैव चिकित्सा कचरे पर भी सुनवाई

जैव चिकित्सा कचरे से जुड़ा मामला W.P. (PIL) No. 1385 of 2012 झारखंड ह्यूमन राइट्स कॉन्फ्रेंस बनाम झारखंड सरकार और अन्य है. इसमें अस्पतालों से निकलने वाले जैव चिकित्सा कचरे के संग्रह, परिवहन, उपचार और निपटारे की व्यवस्था पर सुनवाई हुई.

 

26 फरवरी 2026 के आदेश में निगरानी, जिलेवार जानकारी तैयार करने, निरीक्षण और नियमों के पालन की व्यवस्था से जुड़े निर्देश दिए गए. इस तरह झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े अलग-अलग मुद्दे हाईकोर्ट की सुनवाई तक पहुंचे हैं.

 

रिम्स की व्यवस्था और जमीन, खून की उपलब्धता, कथित संक्रमित खून, जलने वाले मरीजों का इलाज, एंबुलेंस सेवा और जैव चिकित्सा कचरा जैसे मामलों में अदालत ने संबंधित विभागों और संस्थानों से रिपोर्ट और अनुपालन की जानकारी मांगी है.

 

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