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रिम्स : लाश के बीच लगी रही मरीज की ट्रॉली, प्रभारी निदेशक का नहीं गया ध्यान

  • थोड़ी देर के बाद मरीजों को किया गया दूसरी जगह शिफ्ट
Ranchi : रिम्स का प्रभारी निदेशक बनने के बाद डॉ आरके गुप्ता मंगलवार को लाव- लश्कर के साथ ट्रॉमा सेंटर पहुंचे. यहां की व्यवस्था का जायजा लिया और खामियों से अवगत हुए. उनके साथ चिकित्सा अधीक्षक डॉ हिरेंद्र बिरुआ, चिकित्सा उपाधीक्षक डॉ शैलेश त्रिपाठी व अन्य विभागों के चिकित्सक भी निरीक्षण के दौरान साथ थे. लेकिन किसी भी पदाधिकारियों की नजर ट्रॉमा सेंटर के उस व्यवस्था की तरफ नहीं गई, जहां एक लाश के साथ में तीन मरीजों की ट्रॉली को भी रखा गया था. लाश के बगल में ट्रॉली पर लेटे मरीजों के अंदर क्या बीत रही होगी, इसे वही समझ रहे होंगे. हालांकि कुछ वक्त बीत जाने के बाद ट्रॉली पर लेटे हुए मरीजों को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया. लेकिन सवाल एक बार रिम्स की व्यवस्था को लेकर उठ रही है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/06/whatsapp-image-2023_06_06-at-18.59.26_703.jpg"

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डॉ आरके गुप्ता ने राजेंद्र मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की

डॉ आरके गुप्ता का जन्म पटना में हुआ. 1981 में राजेंद्र मेडिकल कॉलेज और अस्पताल से एमबीबीएस करने के बाद उन्होंने 1986 में दरभंगा मेडिकल कॉलेज से ओप्थलमोलोजी में एमएस किया. मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे कुछ समय तक सेंट्रल कोलफील्ड लिमिटेड रांची में चिकित्सा अधिकारी के तौर पर कार्यरत थे. कुछ समय तक वह सरकारी सेवा से भी जुड़े रहे हैं. 1997 में सीनियर रेजिडेंट के तौर पर डॉ गुप्ता आरएमसीएच (अब रिम्स) से जुड़ने के बाद अब तक यहां अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अक्टूबर 2017 से वह नेत्र विभाग के विभागाध्यक्ष के तौर पर कार्यरत हैं. सितंबर 2018 में राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में आई बैंक और कॉर्नियल ट्रांसप्लांटेशन शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. रिम्स में अब तक 61 कॉर्नियल ग्राफ्टिंग सफलतापूर्वक की जा चुकी है.

इमरजेंसी को सुधारना पहली प्राथमिकता- डॉ गुप्ता

प्रभारी निदेशक डॉ राजीव गुप्ता ने कहा कि पहली प्राथमिकता रिम्स के इमरजेंसी को सुधारना है. ड्रग सप्लाई की व्यवस्था को जल्द से जल्द दुरुस्त करना है. मरीजों को सभी जरूरी चीजें रिम्स में ही मुहैया हो जाए, इसका तत्काल प्रभाव से प्रयास किया जाएगा. जल्द से जल्द रिम्स को पटरी पर लाने की व्यवस्था की जाएगी. उन्होंने कहा कि रिम्स को यहां का चिकित्सक ही बेहतर तरीके से चला सकता है. बाहर से आने वाले लोग रिम्स को सही से समझने में बहुत समय लगा देते हैं. यहां के चिकित्सकों को यहां की परेशानियों के बारे में पता है, जिसे वे निदान करा सकते हैं.

क्षेत्रीय नेत्र संस्थान जल्द हो तैयार, इसका करेंगे प्रयास

डॉ राजीव गुप्ता ने कहा कि क्षेत्रीय नेत्र संस्थान का भवन जल्द ही बनकर तैयार हो जाए, इसका प्रयास करेंगे. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक निदेशक को जल्द भवन की तैयारी को लेकर निर्देश दिया गया है. हम सभी मिलकर प्रयास करेंगे कि बिल्डिंग जल्द तैयार हो जाए और नेत्र रोग विभाग वहां शिफ्ट हो जाए. जिससे कि न्यूरो के मरीजों को वहां शिफ्ट किया जा सके. जमीन में रहकर मरीजों को इलाज नहीं कराना पड़े.

हम काम करने वाले लोग हैं, काम करेंगे: डॉ विद्यापति

वरीयता के आधार पर सबसे पहले रहने वाले रिम्स के डीन और मेडिसिन एचओडी डॉ विद्यापति ने कहा कि हम काम करने वाले लोग हैं, कैसे भी काम करेंगे. निदेशक बनाया जाना या नहीं बनाना सरकार का निर्णय है. हम सरकारी नौकरी में हैं. सरकार ने जो निर्णय लिया है बेहतर समझ कर लिया है. डॉ राजीव गुप्ता रिम्स को अपने विजन से आगे बढ़ाएंगे. उन्होंने कहा कि रिम्स में फिलहाल बहुत परेशानी है. मरीजों को अस्पताल में आने से लेकर जाने तक बहुत तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसे सुधारना जरूरी है. उन्होंने साथ ही कहा कि अगर मुझे भी मौका मिलता, तो हम इन परेशानियों को सुधार करना प्राथमिकता में रखते. इसे भी पढ़ें – रांचीः">https://lagatar.in/ranchi-youth-involved-in-criminal-kalu-lama-murder-shot-dead/">रांचीः

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