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उत्तर बिहार में नदियां उफान पर, मंडराने लगा बाढ़ का खतरा

Patna : बिहार के 11 जिलों में अभी से ही बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है. मॉनसून के आते ही इन जिलों में अच्छी वर्षा हो रही है. वहीं नेपाल के तराई इलाकों में भारी बारिश से कई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है. इसके चलते  मिथिलांचल, सीमांचल और कोसी इलाके में नदियां उफान पर हैं. नदियों में जलस्तर बढ़ने से खेतों और घरों में पानी घुस चुका है. आसपास की जमीन का कटाव तेज हो गया है. कई घरों और फसलों को नुकसान पहुंचा है.

बेनीबाद और खगड़िया में बागमती उफान पर

बागमती मुजफ्फरपुर-दरभंगा सीमा के बेनीबाद और खगड़िया जिले में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. किशनगंज और अररिया जिले की नदियों में जलस्तर बढ़ने से खेतों और घरों में पानी घुस चुका है. पूर्णिया जिले में महानंदा नदी में उफान की वजह लोग ऊंचे स्थान पर शरण लेने को मजबूर हो गए हैं. किशनगंज जिले में कई नदियां उफान पर हैं. मालूम हो कि बिहार देश का सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित राज्य है, जो देश के बाढ़ संभावित क्षेत्र का लगभग 17.2 प्रतिशत है. उत्तरी बिहार का 76 और दक्षिण बिहार का 73 प्रतिशत भू-भाग बाढ़ से प्रभावित रहता है. मॉनसून के आने के साथ ही बिहार के 38 में से 28 जिले बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं.

डायवर्सन बहने से 6 पंचायतों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूटा

अररिया जिले में लोहंदरा नदी उफान पर है. इसका पानी खेतों में घुस गया है. कुर्साकांटा प्रखंड के रहटमीना, सौरगांव, तमकुड़ा, पलासमणि समेत कई गावों के निचले इलाकों में पानी घुस गया है. जोकीहाट से बहने वाली बकराव और परमान नदी के जलस्तर में 10 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है. किशनगंज जिले की प्रमुख नदियों का जलस्तर बढ़ने से ठाकुरगंज पोठिया, दिघलबैंक और टेढ़ागाछ में जमीन का कटाव हो रहा है. दक्षिण बिहार के नवादा जिले में रोह में कुंज-गोसाई विगहा के बीच सकरी नदी में नवनिर्मित पुल का डायवर्सन बह जाने से 6 पंचायतों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है. इसे भी पढ़ें – महाराष्ट्र">https://lagatar.in/maharashtra-political-crisis-outrage-over-rauts-statement-what-will-pawar-do/">महाराष्ट्र

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