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गर्मी में सूख जाने वाली नदियों को बाढ़ वाली नदियों से जोड़ा जाए : राज्यपाल

Ranchi : राज्यपाल रमेश बैस ने गुरुवार को बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित ``बाढ़ एवं जलाशय अवसादन रोकने के लिए लैंडस्केप प्रबंधन`` विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया. सम्मेलन में आईसीएआर के विभिन्न शोध संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, केंद्र सरकार, राज्य सरकार और अन्य स्वायत्तशासी संस्थानों के 300 से अधिक वैज्ञानिक एवं पदाधिकारी भाग ले रहे हैं. मौके पर राज्यपाल ने कहा कि देश में बाढ़ चेतावनी प्रणाली को दुरुस्त करने तथा अटल बिहारी वाजपेई के सपनों के अनुरूप मौसमी और सदाबहार नदियों को एक दूसरे से जोड़ने पर जोर दिया गया है. उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से समाज और अर्थव्यवस्था का हर क्षेत्र प्रभावित होता है. परंतु इसकी सर्वाधिक मार किसानों पर पड़ती है. पूर्वी और उत्तरी राज्यों के अलावा अब राजस्थान में भी बाढ़ आ रही है. आवश्यकता है कि गर्मी में सूख जाने वाली नदियों को बाढ़ वाली नदियों से जोड़ा जाए, ताकि बाढ़ और सुखाड़ से निबटने में सरकारी राशि के खर्च को न्यूनतम किया जा सके. वैज्ञानिकों को किसानों के बीच जाकर उनकी समस्याओं और परिस्थितियों को समझना होगा तथा उन्नत तकनीक और बीज उपलब्ध कराना होगा.
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वर्षा जल के समुचित प्रबंधन की जरूरत : कुलपति

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ ओंकार नाथ सिंह ने बीएयू की प्रमुख गतिविधियां और उपलब्धियों पर कहा कि झारखंड में मृदा अपरदन की समस्या बढ़ती जा रही है जिससे प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में उपजाऊ मिट्टी बर्बाद हो रही है. असम और मेघालय के बाद सर्वाधिक वर्षा झारखंड में होती है. आवश्यकता है उस वर्षा जल के समुचित प्रबंधन की. उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन की अनुशंसाओं से केंद्र एवं राज्य सरकारों को लाभकारी कृषि योजना बनाने में मदद मिलेगी.

देना होगा जन आंदोलन का रूप : ग्रामीण विकास सचिव

झारखंड के ग्रामीण विकास सचिव डॉ मनीष रंजन ने कहा कि दुनिया की 52% भूमि और दक्षिण एशिया की 78% भूमि डिग्रेडेशन से प्रभावित है. इससे उत्पादन और संस्कृति का क्षरण तो हो ही रहा है खाद्य सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है और गरीबों का पलायन बढ़ रहा है. भूमि एवं जल संरक्षण प्रयासों को एक जन आंदोलन का रूप देना होगा और इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग जैसी नवीनतम सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करना होगा.

इनके सहयोग से किया जा रहा है सम्मेलन

सम्मेलन का आयोजन इंडियन एसोसिएशन ऑफ सॉइल एंड वॉटर कंजर्वेशनिस्ट्स (भारतीय मृदा एवं जल संरक्षणविद संघ), देहरादून द्वारा भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून; बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची; महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, हजारीबाग, दामोदर घाटी निगम, हजारीबाग तथा झारखंड सरकार के मृदा संरक्षण निदेशालय और झारखंड राज्य वाटरशेड मिशन के सहयोग से किया जा रहा है. सम्मेलन के आयोजन सचिव भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ गोपाल कुमार और डॉ देवाशीष मंडल हैं.
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