Patna News: 12 सैटेलाइट टाउनशिप बसाने को बिहार सरकार जमीन जुटाने में लगी है. लेकिन कुछ इलाकों में किसान और जमीन मालिक अपनी जमीन देने को तैयार नहीं है. ऐसे में राज्य सरकार ने जमीन मालिकों से बातचीत करने का फैसला किया है.
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रिपोर्ट्स के मुताबिक नगर विकास एवं आवास विभाग की टीम किसानों और रैयतों के बीच जाएगी. टीम उन्हें टाउनशिप के लिए जमीन देने की पूरी प्रक्रिया, अलग-अलग विकल्प और उनसे मिलने वाले फायदे के बारे में आसान भाषा में समझाएगी.
विभाग की टीम उन्हें बताएगी कि जमीन देने के कौन-कौन से रास्ते हैं, किस विकल्प में क्या फायदा मिलेगा और पूरी प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी. सरकार पहले लैंड पूलिंग के जरिए जमीन लेने की कोशिश करेगी, अगर बात नहीं बनी तो दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल किया जाएगा.
सरकार की कोशिश है कि टाउनशिप के लिए ज्यादा से ज्यादा जमीन किसानों की सहमति और लैंड पूलिंग के जरिए मिले. अगर जरूरी सड़क, नाली, पार्क और दूसरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. जमीन विकास के बाद तैयार जमीन का 55 प्रतिशत हिस्सा जमीन मालिक को वापस दिया जाएगा, जो टाउनशिप के किसी भी हिस्सा में हो सकता है.
राज्य सरकार टाउनशिप में स्कूल, कॉलेज जैसी अन्य सुविधाओं के लिए रैयतों से जमीन बेचने को कह सकती है. यदि नहीं माने तो नियम को मुताबिक जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाया जा सकता है.
सरकार किसानों से आपसी सहमति के आधार पर जमीन देने की अपील करेगी. इसके बदले उन्हें अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो, टीडीआर और विकास शुल्क में छूट दे सकती है.
टाउनशिप की जमीन उपरोक्त तीन विकल्पों को इस्तेमाल के बाद भी रैयत या जमीन मालिक नहीं मानते हैं, फिर तीनों प्रक्रिया लैंड पूलिंग, आपसी सहमती से जमीन लेना, जमीन खरीदने के विकल्प को एक साथ इस्तेमाल किया जाएगा. यहां बात बन गई तो ठीक है, नहीं तो जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया राज्य सरकार अपना सकती है.
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