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सदन में रोशन लाल चौधरी ने जल संसाधन विभाग व विस्थापन नीति पर उठाए सवाल

Ranchi: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी ने जल संसाधन विभाग, लघु सिंचाई विभाग और विधि विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जल है तो कल है केवल एक नारा नहीं बल्कि धरती की धड़कन है और जल संसाधनों के संरक्षण और उपयोग को लेकर सरकार को गंभीरता से काम करना चाहिए.
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Ranchi: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी ने जल संसाधन विभाग, लघु सिंचाई विभाग और विधि विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जल है तो कल है केवल एक नारा नहीं बल्कि धरती की धड़कन है और जल संसाधनों के संरक्षण और उपयोग को लेकर सरकार को गंभीरता से काम करना चाहिए.

 

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चौधरी ने विभाग के वार्षिक प्रतिवेदन पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2023-24 और 2024-25 के सिंचाई क्षमता के आंकड़े बिल्कुल समान हैं. इससे ऐसा लगता है कि विभाग ने आंकड़ों को केवल कॉपी-पेस्ट किया है और जमीन पर एक हेक्टेयर भूमि पर भी नई सिंचाई क्षमता नहीं बढ़ी है. उन्होंने कहा कि राज्य की 29.74 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में से केवल 42.26 प्रतिशत संभावित क्षमता पर ही सिंचाई उपलब्ध है, जबकि लगभग 60 प्रतिशत भूमि आज भी सिंचाई से वंचित है.

 

 

उन्होंने सदन को बताया कि राज्य में 13 बड़ी और 21 मध्यम सिंचाई परियोजनाएं वर्षों से लंबित हैं. स्वर्ण रेखा परियोजना का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 1978 में 128.89 करोड़ रुपये से शुरू हुई यह योजना अब बढ़कर 14,949.74 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो मूल लागत से कई गुना अधिक है. इसके बावजूद परियोजना का करीब 70 प्रतिशत काम अब भी अधूरा है. रामगढ़ जिले की भैरवी जलाशय योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नहर निर्माण नहीं होने के कारण गोला और चितरपुर क्षेत्र के सब्जी उत्पादक किसान परेशान हैं.

 

विस्थापन के मुद्दे पर चौधरी ने कहा कि राज्य में विस्थापन आयोग का गठन केवल कागजों तक सीमित रह गया है. उन्होंने कहा कि पतरातू, कोनार, ईचा और मैथन डैम के निर्माण में 500 से अधिक गांव उजड़ गए और 5 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए, लेकिन उन्हें आज तक उचित मुआवजा और रोजगार नहीं मिला. उन्होंने मांग की कि सरकार राज्य स्तरीय विस्थापन कार्ड जारी करे और विस्थापितों को समय पर नौकरी और मुआवजे की गारंटी दे.

 

विधि विभाग पर चर्चा करते हुए विधायक ने कहा कि झारखंड हाईकोर्ट और लोअर कोर्ट में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं. इसके कारण आम लोगों को न्याय के लिए वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है. उन्होंने सरकार से इन समस्याओं के समाधान के लिए ठोस और त्वरित कदम उठाने की अपील की.

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