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पूर्वजों की गलतियों को स्वीकार करने में परेशानी नहीं
"वज्रसुची तुंक" पुस्तक का हवाला देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि पिछली पीढ़ियों ने कई गलतियां की हैं, हमें इसे स्वीकार करने में परेशानी नहीं होनी चाहिए. अगर आपको लगता है कि हमारे पूर्वजों ने गलतियां की हैं तो वे हीन हो जाएंगे, ऐसा नहीं होगा. सभी के पूर्वजों ने गलतियां की हैं. इसे भी पढ़ें - समलैंगिक">https://lagatar.in/same-sex-marriage-mother-of-two-children-fell-in-love-with-a-16-year-old-girl-got-married/">समलैंगिकविवाह : दो बच्चों की मां को 16 साल की युवती से हुआ प्यार, रचायी शादी!
जनसंख्या नीति बनायी जानी चाहिए
गौरतलब है कि मोहन भागवत ने दशहरा समारोह में कहा था कि हिंदू-मुस्लिम सभी के लिए जनसंख्या नीति बनायी जानी चाहिए. जनसंख्या जितनी अधिक होगी उतना बोझ ज्यादा होगा. जनसंख्या का ठीक से उपयोग किया तो वह साधन बनता है. हमको भी विचार करना होगा कि हमारा देश 50 वर्षों के बाद कितने लोगों को खिला और झेल सकता है. मोहन भागवत ने कहा कि जनसंख्या की एक समग्र नीति बने और सब पर समान रूप से लागू हो. बिना संसाधनों के निर्माण बढ़ता है तो वह बोझ बन जाता है. इस पर ध्यान देने की जरूरत है.जनसंख्या को संपत्ति मामना एक दृष्टिकोण है लेकिन हमें दोनों पहलुओं को समझना होगा. इसे भी पढ़ें - त्योहारी">https://lagatar.in/inflation-shock-in-festive-season-cng-png-became-costlier-by-rs-3/">त्योहारीसीजन में महंगाई का झटका, 3 रुपये महंगी हुई सीएनजी-पीएनजी [wpse_comments_template]

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