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बरही में शिलापट्ट पर बवाल, भड़के पंचायत प्रतिनिधियों ने किया विरोध

कहा-पंचायती राज प्रतिनिधियों के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं पुराने शिलापट्ट को हटाया, नए में सिर्फ सांसद-विधायक का है नाम Barhi : बरही के कोल्हुआकला पंचायत के उत्क्रमित मध्य विद्यालय बेला के सौंदर्यीकरण के लिए बदले गए शिलापट्ट को लेकर बवाल खड़ा हो गया है. इसके साथ ही शिलान्यास कार्यक्रम विवादों में घिर गया है. जिला परिषद उपाध्यक्ष किशुन यादव ने स्थानीय विधायक सह झारखंड विधानसभा निवेदन समिति के सभापति उमाशंकर अकेला यादव पर पंचायत प्रतिनिधियों के सम्मान से खिलवाड़ का आरोप लगाया है. उन्होंने बताया कि डीएमएफटी मद के 15 लाख से उत्क्रमित मध्य विद्यालय बेला का सौंदर्यीकरण होना है. इसका शिलान्यास 29 मई को ही होना था. संवेदक अमरेंद्र कुमार यादव ने सांसद जयंत सिन्हा, विधायक उमाशंकर अकेला यादव, जिला परिषद अध्यक्ष उमेश प्रसाद मेहता, उपाध्यक्ष किशुन यादव और स्थानीय मुखिया मंगलदेव यादव के नाम से शिलापट्ट भी लगाया. परंतु संवेदक की अनुपस्थिति के कारण विधायक भड़क गए और बिना शिलान्यास के ही बैरंग लौट गए, जिससे कार्यक्रम स्थगित हो गया. अचानक 14 जून को नए शिलापट्ट के साथ विधायक ने उस योजना का शिलान्यास किया. इस नए शिलापट्ट में सिर्फ सांसद और विधायक का ही नाम अंकित है. सभी पंचायती राज प्रतिनिधियों का नाम हटा दिया गया है. इस पर पंचायत जनप्रतिनिधि भड़क गए और कहा कि यह अनुचित व जनप्रतिनिधियों के सम्मान के साथ खिलवाड़ है. इसका सभी पंचायती राज पदाधिकारी विरोध करते हैं. [caption id="attachment_669812" align="alignnone" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/06/7.jpg"

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जिला परिषद उपाध्यक्ष के खिलाफ बिफरे विधायक, कहा-पहले नियमों की जानकारी लें, फिर बात करें

संबंधित मामले में पूछे जाने पर विधायक अकेला ने कहा कि विरोध के पहले जिला परिषद उपाध्यक्ष को सरकारी नियमों की गहनता से अध्ययन करनी चाहिए. पंचायती राज जनप्रतिनिधियों को जनता को दिग्भ्रमित करने के पहले सरकार के आदेश को समझना चाहिए. उन्होंने कहा कि जिला परिषद उपाध्यक्ष को प्रोटोकॉल पता करना चाहिए. विधायक ने बताया कि राज्य सरकार ने प्रत्येक जिला के उप विकास आयुक्त को निर्देशित किया है कि सिर्फ 15वीं वित्त से संचालित योजनाओं में ही सांसद, विधायक के साथ जिला परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और प्रतिनिधियों का नाम अंकित होगा. इसके अतिरिक्त अन्य किसी भी योजना के शिलान्यास या उद्घाटन पट्टिका में पंचायती राज जनप्रतिनिधियों का नाम नहीं होगा. जिला परिषद उपाध्यक्ष को पहले नियमों का ज्ञान होना चाहिए, फिर हल्ला करना चाहिए. उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि जिला परिषद उपाध्यक्ष को सस्ती लोकप्रियता लेने की आदत है, जो बिना किसी काम का उद्घाटन और शिलान्यास के लिए व्याकुल रहते हैं. उद्घाटन और शिलान्यास को छोड़ जनहित के कार्य से जुड़ें. इसे भी पढ़ें : ‘आदिपुरुष’">https://lagatar.in/predictions-about-adipurush-the-film-will-earn-more-than-rs-80-crore-on-the-first-day-of-release/">‘आदिपुरुष’

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