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अमेरिकी Dollar के मुकाबले रुपया 86.59 पर पहुंचा, कांग्रेस का तंज, पीएम मोदी अपने ही खोदे गड्ढे में फंसते जा रहे हैं...

NewDelhi : खबर है कि आज सोमवार को रुपया 55 पैसे की गिरावट के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सर्वकालिक निचले स्तर 86.59 पर पहुंच गया. अस्थिर वैश्विक संकेतों के बीच मजबूत अमेरिकी मुद्रा के प्रभाव के कारण रुपया टूटा. विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल के अलावा विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी और घरेलू शेयर बाजारों में नकारात्मक रुख के कारण स्थानीय मुद्रा पर भारी दबाव था. रुपये में गिरावट का सिलसिला सोमवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में जारी रहने पर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हल्ला बोला. कांग्रेस ने कहा, पीएम मोदी अपने ही खोदे गड्ढे में फंसते जा रहे हैं.

मोदी जी 64 वर्ष के होने वाले थे और डॉलर के मुकाबले रुपया 58.58 पर था

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, जब मोदी जी ने प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला था तब वह 64 वर्ष के होने वाले थे और डॉलर के मुकाबले रुपया 58.58 पर था. उस समय वह रुपये को मजबूत करने को लेकर बहुत कुछ बोला करते थे. उन्होंने रुपये ते मूल्य में गिरावट को पूर्व पीएम( डॉ मनमोहन सिंह अब दिवंगत) की उम्र से जोड़ दिया था. जयराम रमेश कहा, अब देखिए, मोदी जी इस वर्ष के अंत तक 75 के होने की तैयारी ही कर रहे हैं और रुपया पहले ही डॉलर के मुकाबले 86 पार चुका है. जैसे-जैसे रुपया गिरता जा रहा है, वह अपने ही खोदे गड्ढे में फंसते जा रहे हैं.

86.12 प्रति डॉलर पर खुला रुपया

आज सोमवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 86.12 प्रति डॉलर पर खुला. शुरुआती सौदों के बाद डॉलर के मुकाबले सर्वकालिक निचले स्तर 86.59 पर पहुंच गया. यह पिछले बंद भाव के मुकाबले 55 पैसे की भारी गिरावट है. इससे पहले शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 18 पैसे टूटकर 86.50 पर बंद हुआ था. 30 दिसंबर को यह 85.52 रुपये पर बंद हुआ था,

कांग्रेस अर्थव्यवस्था मामले में सरकार पर लगातार हमलावर है

कांग्रेस अर्थव्यवस्था मामले में सरकार पर लगातार हमलावर है. इससे पहले जयराम रमेश ने कहा था, गैर-जैविक प्रधानमंत्री को फिर से पता चल रहा है कि आखिरकार वह एक इंसान हैं. हमारे शेयर बाजारों में विदेशी निवेशकों ने पिछले छह दिनों में दो अरब डॉलर निकालकर 2025 की शुरुआत की है. यह दिखाता है कि हमारे कमजोर मैक्रो फंडामेंटल्स का बढ़ता प्रभाव - स्थिर वेतन, निजी निवेश में कमी, उपभोग वृद्धि में सुस्ती. उन्होंने कहा कि यह सेबी अध्यक्ष के हितों के टकराव के बारे में खुलासे और वियतनाम तथा मलयेशिया सहित अन्य देशों की तुलना में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए गंतव्य के रूप में भारत की निरंतर गिरावट के बाद वित्तीय बाजारों में निवेशकों के विश्वास की पूर्ण कमी को भी दर्शाता है. कहा कि रुपया दिन-प्रतिदिन डॉलर के मुकाबले नये निचले स्तर को छू रहा है, जिससे मुद्रा जोखिम बढ़ रहा है. हर खबर के लिए हमें फॉलो करें Whatsapp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaAT9Km9RZAcTkCtgN3q">https://whatsapp.com/channel/0029VaAT9Km9RZAcTkCtgN3q">https://whatsapp.com/channel/0029VaAT9Km9RZAcTkCtgN3q

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