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एस जयशंकर चीनी विदेश मंत्री से मिले, पूर्वी लद्दाख पर चर्चा की, बिलावल भुट्टो से नहीं होगी बात

 
Panaji : विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा आज गुरुवार को एससीओ  सम्मेलन में भाग लेने आये  चीन के अपने समकक्ष छिन कांग के साथ द्विपक्षी संबंधों पर चर्चा किये जाने की खबर है. सूत्रों के अनुसार दोनों के बीच मुख्य रूप से पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर जारी विवाद को लेकर चर्चा हुई. जयशंकर ने चीन के विदेश मंत्री से कहा कि पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध को जल्द से जल्द सुलझाया जाना चाहिए. कहा कि दोनों देशों के बीच बेहतर संबंधों के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है. नेशनल">https://lagatar.in/category/desh-videsh/">नेशनल

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जयशंकर ने रूस के सर्गेई लावरोव के साथ भी समीक्षा की

इस क्रम में जयशंकर ने ट्वीट किया, चीन के विदेश मंत्री के साथ आपसी संबंधों पर विस्तृत चर्चा हुई. हमारा ध्यान बाकी के मुद्दों को हल करने और सीमाई क्षेत्रों में शांति सुनिश्चित करने पर है. यह बैठक संघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों की बैठक से इतर हुई. इसके अलावा जयशंकर ने रूस के अपने समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ भी द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की. दोनों नेताओं द्वारा यूक्रेन संघर्ष और साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की गयी.

विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने शांति वार्ता के लिए दौरा किया था

बिलावल भुट्टो की यात्रा जुलाई 2011 के बाद से किसी भी पाकिस्तान के विदेश मंत्री की भारत की पहली यात्रा है. पूर्व में तत्कालीन विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने शांति वार्ता के लिए दौरा किया था. बता दें कि भारत की ओर से साफ किया जा चुका है कि SCO समिट के इतर भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय वार्ता नहीं होगी. पाकिस्तान भी  पहले स्पष्ट कर चुका है कि विदेश मंत्री गोवा में रहते हुए अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर के साथ कोई द्विपक्षीय बैठक नहीं करेंगे.

एससीओ प्रभावशाली आर्थिक और सुरक्षा समूह है

बता दें कि एससीओ एक प्रभावशाली आर्थिक और सुरक्षा समूह है. वर्तमान में   यह सबसे बड़े अंतर-क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठनों में से एक बनकर उभरा है.  रूस, चीन, किर्गिज गणराज्य, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपतियों ने 2001 में शंघाई में एक सम्मेलन में एससीओ की स्थापना की थी.  2017 में भारत और पाकिस्तान  इसके स्थायी सदस्य बने थे.
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