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डॉक्टरों को लग गयी है बुरी आदत, तो सदर अस्‍पताल में आखिर कैसे होगा इलाज

 
Ranchi:  राजधानी के दो सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल सदर और रिम्स में इलाज के नाम पर कोरोना काल में जो कुछ भी हो रहा है, वो किसी से भी छिपा नहीं है. सदर अस्पताल में इलाज के दौरान वहां के डॉक्टरों का रवैया  किसी से छिपा नहीं है. जो वहां इलाज कराने आये लोगों के लिए भी चिंता का विषय है. यहां बता दें कि सदर अस्पताल में करोड़ों खर्च करके लगभग सभी तरह की बीमारियों के इलाज की व्यवस्था की गयी है. लेकिन इलाज करने वाले डॉक्टर सिर्फ अपनी ड्यूटी बजाने और सैलरी लेने में ही अपनी रूची दिखाते हैं. वहीं सदर अस्पताल में ड्यूटी करने वाले डॉक्टरों की उपस्थ्ती तो रहती है. लेकिन उन्हें मरीजों के इलाज में कोई रूची नहीं रहती. साथ ही सदर अस्पताल के डॉक्टर ज्यादातर मरीजों को रिम्स सीधे रिम्स रेफर कर देते हैं, जिससे रिम्स के डॉकेचरों पर भी  बोझ बढ़ता जाता है.

सुविधाओं की नहीं है कोई कमी

यहां बता दें कि सदर अस्पताल में लगभग सभी टेस्ट, इलाज के लिए बेड के अलावा सभी सुविधायें मौजूद हैं. इतना ही नहीं लगभग सभी प्रकार की स्‍पेशल फैकल्‍टी की भी सदर  में कोई कमी नहीं है. लेकिन इसके बावजूद सदर अस्पताल के डॉक्टर अपनी जिम्मेवारी से बचने के लिए मरीजों को रिम्स रेफर करने की पुरानी आदत से बाज नहीं आते हैं.

रिम्‍स के डाक्‍टरों में है नाराजगी

सदर अस्पताल के डॉक्टरों की इस आदत के कारण रिम्‍स के डॉक्टरों में भी काफी नाराजगी देखी जाती है. कई जूनियर डॉक्टरों से बात करने पर उन्होंने बताया कि सदर अस्पताल से कई ऐसे मरीज आते हैं, जिन्हें बिना इलाज किये ही भेज दिया जाता है.

इमरजेंसी में खाली रहते पड़े रहते हैं बेड

सदर अस्पताल में बिल्डिंग तैयार होने के बावजूद  वहां की तस्वीर नहीं बदली है. वहीं  सदर अस्पताल में अब इमरजेंसी तो हाइटेक हो चली है,  लेकिन डॉक्टरों की खानापूर्ति की आदत वही पुरानी है. बमुश्किल ही सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों को पाया जाता है. फिलहाल इमरजेंसी में 8 बेडों की व्यवस्था की गयी है,जिसमें से ज्यादातर बेड हमेशा खाली ही पड़े रहते हैं.

डॉक्टरों के रवैये से मरीजों को होती है परेशानी

सदर अस्पताल में डॉक्टरों के रवैया से मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. कुछ लोगों से बात करने पर उन्होंने बताया कि जब भी एमरजेंसी में सदर ले जाने की बात होती है, तो लोग मरीज को सदर नहीं ले जाना चाहते हैं, इसके पीछे  की वजह डॉक्‍टरों की रेफर करने वाली आदत है.
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