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साहित्य कला संगम मंच का शुभारंभ, वक्ताओं ने साहित्य के गिरते स्तर पर जताई चिंता

Ranchi : हिमालयन अपडेट साहित्य सृजन मंच, की झारखंड इकाई ने रविवार को राजधानी रांची के सिटी पैलेस होटल में साहित्य कला संगम मंच का शुभारंभ किया. संस्थापक अनिल जामवाल और राष्ट्रीय संरक्षक दीपशिखा श्रीवास्तव के संरक्षण में झारखंड में कामेश्वर सिंह कामेश,  प्रसिद्ध गज़लकार दिलशाद नज़मी, प्रसिद्ध स्तंभकार सुनील बादल, झारखंड के प्रसिद्ध लोकगायक सदानंद सिंह यादव, ग़ज़लकार चंद्रिका ठाकुर देशदीप, शालिनी नायक, राज रामगढी, डॉ ममता मनीष सिन्हा, अनुराधा सिंह अनु, डॉ रजनी शर्मा चंदा, स्तंभकार राजीव थेपड़ा, प्रख्यात तबला वादक सूरज श्रीवास्तव उपस्थित रहे. झारखंड सेवा श्री फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ धर्मवीर सिंह, सचिव डॉ आकांक्षा चौधरी ने कार्यक्रम का समन्वय और आयोजन किया. मंच पर उपस्थित प्रबुद्धजनों ने "साहित्य की वर्तमान स्थिति और अनेक मंचों के गठन" इस विषय पर अपने विचार रखे. कामेश्वर सिंह कामेश जी ने अपने स्वागत भाषण में अनेक साहित्यिक मंचों के गठन को नवांकुर कवियों के लिए बेहतर बताया और कहा कि इन मंचों पर आने वाले लोग किसी न किसी रूप में साहित्य की सेवा कर रहे हैं. [caption id="attachment_395463" align="alignnone" width="360"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/08/ranchi-2-360x504.jpg"

alt="" width="360" height="504" /> साहित्य कला संगम मंच का शुभारंभ[/caption] इसे भी पढ़ें- करंट">https://lagatar.in/15-lakh-compensation-will-be-given-to-the-families-of-three-brothers-and-sisters-killed-by-current-one-member-will-get-a-job/">करंट

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लोकगायक सदानंद सिंह यादव ने कई मंचों पर संस्थापकों द्वारा तानाशाह पूर्ण रवैये और साहित्य के गिरते स्तर पर अपनी चिंता व्यक्त की. सुनील बादल ने कहा कि समय की धारा के साथ साहित्य लेखन और लेखकों की सोच और लेखनी में काफ़ी परिवर्तन आया है. अब सोशल मीडिया और मनोरंजन प्रदान आधुनिक समाज अतुकान्त रचना और लघुकथा की तरफ बढ़ रहे हैं और प्रिंट मीडिया भी डिजिटल मीडिया में परिवर्तित हो गया है. डॉ. आकांक्षा चौधरी ने सभी प्रबुद्ध लेखकों का कलम और पुष्प से स्वागत किया और सिटी पैलेस होटल के संस्थापक विजय राजगड़िया को भी सम्मानित किया. रामगढ़ से आए राज रामगढी और डॉ. ममता मनीष सिन्हा ने कहा कि समय के साथ हमें परिवर्तन को स्वीकार करना चाहिए पर साहित्य का गिरता स्तर चिंतनीय है. डॉ. ममता मनीष ने मंच का बहुत सुंदर संचालन किया. चंद्रिका ठाकुर देशदीप जी ने धन्यवाद ज्ञापन में कहा कि बड़े साहित्यकारों से गूढ़ बातें सीखकर साहित्यकारों को अपनी वास्तविकता बनाकर आगे बढ़ना चाहिए. कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया. इसे भी पढ़ें- जमानत">https://lagatar.in/even-after-4-days-of-getting-bail-two-congress-mlas-are-still-in-jail-not-getting-bailer/">जमानत

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