Ranchi : धनबाद में पकड़े गए मेजर उर्फ सैफी से शुरुआती पूछताछ में पुलिस को कई अहम जानकारियां मिली हैं. बताया जा रहा है कि वह गिरोह के लिए शूटरों का इंतजाम करने के साथ-साथ वारदात की प्लानिंग और हथियारों की व्यवस्था में भी सक्रिय भूमिका निभाता था. ठेकेदारों और कारोबारियों से वसूली गई रंगदारी की रकम का पूरा हिसाब भी वही रखता था.
पूछताछ में यह भी सामने आया कि धमकी देने के लिए वर्चुअल नंबर से कॉल कर कारोबारियों पर दबाव बनाया जाता था. इसके बाद स्थानीय नेटवर्क के जरिए पर्चा और मैसेज वायरल कर दहशत फैलाने की रणनीति अपनाई जाती थी. पुलिस के अनुसार इस नेटवर्क से जुड़े कई लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है.
सैफी गिरोह के लिए हथियारों की सप्लाई और शूटरों का मैनेजमेंट भी करता था. किस वारदात में किसे लगाना है, कहां से हथियार लाना है और किसके पास कौन सा हथियार रहेगा, इन सबकी जिम्मेदारी उसी के पास थी. वसूली गई रकम का बंटवारा भी वह काम के आधार पर तय करता था और पूरा रिकॉर्ड रखता था.
पूछताछ में उसने रंगदारी की रकम बाहर भेजने के तरीके की भी जानकारी दी है. पुलिस को बताया गया कि वसूली का एक बड़ा हिस्सा दुबई में बैठे सरगना तक पहुंचाया जाता था. इसके लिए अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता था. इस खुलासे के बाद पुलिस अब पैसे के ट्रांजेक्शन और इसमें शामिल मददगारों की पहचान में जुट गई है.
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