-सालखन ने झामुमो-यूपीए को आदिवासी मुद्दे पर पाखंड की राजनीतिक करने का आरोप लगाया - बाबूलाल से आदिवासी मुद्दे को टेकओवर करने की मांग Ranchi: पूर्व भाजपा सांसद और आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू सोमवार को रांची में भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल से मिले. दोनों नेताओं के बीच करीब 45 मिनट तक वार्ता हुई. सालखन ने बाबूलाल से कहा कि झामुमो और यूपीए आदिवासी मुद्दे पर पाखंड की राजनीति कर रहा है. एक ओर पारसनाथ का मरांग बुरू जो आदिवासियों का है, उसे जैन धर्मियों को देने का काम किया. वहीं आदिवासी के नाम पर केवल डंका बजाया जा रहा है. जमीन पर कोई काम नहीं हो रहा है. इसे भी पढ़ें- कोलेबिरा">https://lagatar.in/kolebira-police-launched-vehicle-checking-campaign-in-lachragarh-recovered-fine/">कोलेबिरा
: पुलिस ने लचरागढ़ में चलाया वाहन चेकिंग अभियान, वसूला जुर्माना जमीन, नौकरी सभी गिरवी रखे जा रहे हैं. उन्होंने बाबूलाल मरांडी को सलाह देते हुए कहा कि अगर आप आदिवासी नेता हैं, आदिवासयित को बचाना चाहते हैं तो आपको और आपकी पार्टी को आदिवासी मुद्दे को टेकओवर करना चाहिए. अगर प्रधानमंत्री ने एक आदिवासी महिला को राष्ट्रपति बनाया है तो जरूर ही उनका कोई एजेंडा है. इसलिए अब आपको और आपकी पार्टी को खुलकर आदिवासी और झारखंडी मसले पर आना होगा. जिसमें नियोजन नीति और सरना धर्म कोड महत्वपूर्ण हैं. सरना धर्म कोड से ही आदिवासियत बच सकती है. नियोजन नीति का आधार प्रखंडवार हो. क्योंकि अधिकांश तृतीय और चतुर्थ वर्ग की नौकरियां प्रखंडों में ही हैं. अगर पंचायतवार नियोजन नीति बन जाए तो ये नौकरियां सुरक्षित हो जाएंगी. इसे भी पढ़ें- रांची">https://lagatar.in/ranchi-university-welcome-to-prof-manay-munda-on-being-made-head-of-department-of-post-graduate-mundari/">रांची
विवि : स्नातकोत्तर मुंडारी का विभागाध्यक्ष बनाये जाने पर प्रो मनय मुंडा का स्वागत उन्होंने कहा कि संथाल पगरना में झामुमो और यूपीए मुस्लिम और ईसाई को पनाह दे रही हैं. आदिवासियत खत्म हो रही है. इसे भी भाजपा को मुद्दा बनाना चाहिए. कुरमी को एसटी बनाने की मांग सही नहीं है. इससे आदिवासी ही खतरे में पड़ जाएंगे. जो आदिवासी धर्म परिवर्तन कर चुके हैं, उन्हें एसटी के लाभ से वंचित करने के लिए आपकी ओर से केंद्र सरकार से कानून बनाने की मांग करनी चाहिए. अगर आप और भाजपा इन मुद़्दों को लेकर चलते हैं तो निश्चित ही इससे भाजपा और आपका भला होगा. क्योंकि आप प्रथम सीएम रहे हैं. एक-एक चीज को जानते और समझते हैं. अगर भविष्य में आप सीएम बनना चाहते हैं तो आपको झारखंडी और आदिवासी मुद्दे को टेकओवर करना चाहिए. सालखन ने शुभम संदेश से बातचीत करते हुए कहा कि उनका मकसद केवल एमपी-एमएलए बनना नहीं है. झारखंड और आदिवासियों के लिए कुछ करना है. वे पहले भी भाजपा में रहे हैं, इसलिए भाजपा में जाने से कोई एतराज नहीं है. मगर अभी उसका समय नहीं आया है. सब समय पर होगा. [wpse_comments_template]
सालखन ने बाबूलाल के साथ की लंबी बैठक, कहा- भाजपा में जाने से एतराज नहीं, मगर समय पर

Leave a Comment