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संत शिरोमणि विद्यासागर जी महाराज की डोंगरगढ़ में समाधि

Hazaribagh: जैन धर्म व जन जन के संत, संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की चंद्रगिरी तीर्थ डोंगरगढ़ में समाधि 17 फरवरी को हुई. मीडिया प्रभारी विजय जैन लुहाड़िया ने बताया कि संत शिरोमणि आचार्य भगवंत श्री 108 विद्यासागर जी महाराज का जन्म 10 अक्टूबर 1946 में विद्याधर के रूप में कर्नाटक के बेलगांव जिले के सदलगा में शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था. उनके पिता श्री मल्लप्पा थे, जो बाद में मुनि मल्लिसागर बने. उनकी माता श्रीमंती थी जो बाद में आर्यिका समयमति बनीं. आचार्य विद्यासागर जी को 30 जून 1968 में अजमेर में 22 वर्ष की आयु में आचार्य ज्ञानसागर ने दीक्षा दी, जो आचार्य शांतिसागर शिष्य थे. आचार्य विद्यासागर जी को 22 नवम्बर 1972 में ज्ञानसागर जी द्वारा आचार्य पद दिया गया था. केवल विद्यासागर जी के बड़े भाई गृहस्थ है. उनके अलावा सभी घर के लोग संन्यास ले चुके हैं. उनके भाई अनंतनाथ और शांतिनाथ ने आचार्य विद्यासागर जी से दीक्षा ग्रहण की और मुनि योगसागर जी और मुनि समयसागर जी कहलाये. इसे भी पढ़ें-रामगढ़">https://lagatar.in/ramgarh-coal-smugglers-attacked-police-team-fir-registered/">रामगढ़

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कई भाषाओं के जानकार थे संत शिरोमणि विद्यासागर जी

आचार्य विद्यासागर जी संस्कृत, प्राकृत सहित विभिन्न आधुनिक भाषाओं हिन्दी, मराठी और कन्नड़ में विशेषज्ञ स्तर का ज्ञान रखते हैं. उन्होंने हिन्दी और संस्कृत के विशाल मात्रा में रचनाएं की हैं. सौ से अधिक शोधार्थियों ने उनके कार्य का मास्टर्स और डॉक्ट्रेट के लिए अध्ययन किया है. उनके कार्य में निरंजना शतक, भावना शतक, परीषह जाया शतक, सुनीति शतक और शरमाना शतक शामिल हैं. उन्होंने काव्य मूक माटी की भी रचना की है. विभिन्न संस्थानों में यह स्नातकोत्तर के हिन्दी पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता है. आचार्य विद्यासागर जी कई धार्मिक कार्यों में प्रेरणास्रोत रहे हैं. आचार्य विद्यासागर जी के शिष्य मुनि क्षमासागर जी ने उन पर आत्मान्वेषी नामक जीवनी लिखी है. इस पुस्तक का अंग्रेज़ी अनुवाद भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशित हो चुका है. मुनि प्रणम्यसागर जी ने उनके जीवन पर अनासक्त महायोगी नामक काव्य की रचना की है.आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी का 9 अंक विशेष रहा. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/02/0521_acaaraya-1.jpg"

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माया मोह से परे थे आचार्य विद्यासागर महाराज

मीडिया प्रभारी विजय जैन लुहाड़िया ने बताया कि यह एक संयोग है. संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी के बारे में बताते हुए कहा कि उनका कोई बैंक खाता नहीं, कोई ट्रस्ट नहीं, कोई जेब नहीं, कोई मोह माया नहीं, अरबों रुपये जिनके ऊपर न्यौछावर होते हैं उन गुरुदेव के कभी धन को स्पर्श नहीं किया. आजीवन चीनी का त्याग, आजीवन नमक का त्याग, आजीवन चटाई का त्याग, आजीवन हरी सब्जी का त्याग, फल का त्याग, अंग्रेजी औषधि का त्याग, सीमित ग्रास भोजन, सीमित अंजुली जल, 24 घण्टे में एक बार 365 दिन, आजीवन दही का त्याग, सूखे मेवा, ड्राई फ्रूट्स का त्याग, आजीवन तेल का त्याग, सभी प्रकार के भौतिक साधनों का त्याग, थूकने का त्याग, एक करवट में शयन बिना चादर, गद्दे तकिए का त्याग, सिर्फ तख्त पर किसी भी मौसम में शयन. पूरे भारत में सबसे ज्यादा दीक्षा देने वाले एक ऐसे संत जो सभी धर्मों में पूजनीय, पूरे भारत में एक ऐसे आचार्य जिनका लगभग पूरा परिवार ही संयम के साथ मोक्षमार्ग पर चल रहा है. शहर से दूर खुले मैदानों में नदी के किनारों पर या पहाड़ों पर अपनी साधना करना. अनियत विहारी यानि बिना बताये विहार करना. प्रचार प्रसार से दूर. आचार्य देशभूषण जी महराज जब ब्रह्मचारी व्रत से लिए स्वीकृति नहीं मिली तो गुरुवर ने व्रत के लिए तीन दिवस निर्जला उपवास किया और स्वीकृति लेकर माने, ब्रह्मचारी अवस्था में भी परिवार जनों से चर्चा करने अपने गुरु से स्वीकृति लेते थे और परिजनों को पहले अपने गुरु के पास स्वीकृति लेने भेजते थे. इसे भी पढ़ें-जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-dastar-competition-will-be-held-on-25th-february-in-sakchi-gurudwara/">जमशेदपुर

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मानव के कल्याण के लिए लगे रहे आचार्य विद्यासागर जी महाराज

आचार्य भगवंत श्री विद्यासागर जी जो न केवल मानव समाज के उत्थान के लिए इतने दूर की सोचते हैं व मूक प्राणियों के लिए भी उनके करुण ह्रदय में उतना ही स्थान है. शरीर का तेज ऐसा जिसके आगे सूरज का तेज भी फिका और कान्ति में चांद भी फीका है. ऐसे हम सबके भगवन चलते फिरते साक्षात् तीर्थंकर सम संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्या सागर जी के चरणों में हम सब शत शत नमन नमन नमन करते हैं. हम धन्य है जो ऐसे महान गुरुवर का सनिध्य हमे प्राप्त हुआ. प्रधानमंत्री हो या राष्ट्रपति सभी के पद से अप्रभावित, साधना में रक्त गुरुदेव हजारों गाय की रक्षा, गौशाला समाज ने बनाई. हजारों बालिकाओ को संस्कारित आधुनिक स्कूल बनवाये. [wpse_comments_template]

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