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Same-sex marriage : SC ने माना, यह विषय संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है, अगली सुनवाई 3 मई को

New Delhi : समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता दिये जाने की मांग को लेकर आज गुरुवार को छठे दिन SC में सुनवाई जारी रही. आज सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार किया कि यह विषय संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है. खबरों के अनुसार कोर्ट ने केंद्र सरकार की इस दलील को भी मान लिया कि ऐसी शादी को मान्यता देने से कई कानूनों पर अमल मुश्किल हो जायेगा.  नेशनल">https://lagatar.in/category/desh-videsh/">नेशनल

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सुनवाई के क्रम में 5 जजों की बेंच ने सरकार से सवाल किया कि क्या वह समलैंगिक जोड़ों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए कोई कानून बनाना चाहेगी?. जजों के अनुसार पति-पत्नी की तरह साथ रह रहे समलैंगिक जोड़ों को साझा बैंक अकाउंट खोलने जैसी सुविधा दिया जाना उचित होगी. अब 3 मई को इस मामले पर सुनवाई की जायेगी.

2018 में समलैंगिक संबंधों को अपराध के दायरे से बाहर निकाल दिया गया था.

मामले की तह में जायें तो 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को अपराध के दायरे से बाहर निकाल दिया था. इस फैसले के बाद से ही समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की मांग ने जोर पकड़ लिया. दलील दी जा रही है कि समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता न होने की वजह से ऐसे जोड़े बहुत से कानूनी अधिकारों से वंचित हैं. वह जिस पार्टनर के साथ जीवन बिता रहे हैं, उसके नाम वसीयत नहीं कर सकते. अपने बैंक अकाउंट में नॉमिनी भी नहीं बना सकते. उसका जीवन बीमा नहीं करा सकते.

34 देशों में सेम सेक्स मैरिज को कानूनी दर्जा मिला हुआ है

इससे पहले कल 5 वें दिन हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता पक्ष ने विस्तृत दलील दी. कोर्ट को बताया गया कि विश्व के 34 देशों में सेम सेक्स मैरिज को कानूनी दर्जा मिला हुआ है. याचिकाकर्ताओं के अनुसार स्पेशल मैरिज एक्ट की व्याख्या में यदि छोटा सा बदलाव किया जाये तो इस समस्या का समाधान हो सकता है. कहा गया कि अलग-अलग धर्मो और जाति के लोगों को शादी की सुविधा देने के लिए बनाये गये कानून की धारा 4 में दो लोगों की शादी की बात लिखी गयी है. कोर्ट कह दे कि इसमें समलैंगिक लोग भी शामिल है.। हालांकि केंद्र सरकार ने सुनवाई का विरोध करते हुए कोर्ट से कहा कि पूरे समाज पर असर डालने वाले इस विषय पर संसद में चर्चा होनी चाहिए. इस पर राज्यों की भी राय ली जानी चाहिए. साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट अपनी तरफ से एक नयी वैवाहिक संस्था नहीं बना सकता. आज सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने जजों को बताया कि अगर समलैंगिक शादी को कानूनी दर्जा दिया गया तो

इससे 160 कानून प्रभावित होंगे

सॉलिसीटर जनरल ने उदाहरण दिया कि समलैंगिक शादी में उम्र को लेकर भी कानून में बदलाव करना पड़ेगा. कहा कि यह कानून भी है कि पति की मृत्यु पर बहू ससुर से गुजारा भत्ता पाने की हकदार है. कहा कि समलैंगिक जोड़े में से किसी एक की मौत के बाद क्या दूसरा उसके पिता से कह सकता है कि वह बहू है? कोई भी कोर्ट यह कैसे तय कर पायेगा.

कोई कहेगा कि परिवार में ही शादी करना उसकी पसंद है

सॉलिसीटर जनरल ने दलील दी कि सूर्यास्त के बाद महिला की गिरफ्तारी न किये जाने का कानून है. समलैंगिक जोड़े में से किसी ने भी आत्महत्या कर ली और उसे उकसाने के आरोप में दूसरे की गिरफ्तारी करनी है तो यह कैसे तय होगा कि उसे पुरुष की तरह मानना है या स्त्री की तरह?" यह भी कहा कि आज परिवार के लोगों से शारीरिक संबंध(इंसेस्ट) और शादी को कानूनन गलत माना जाता है. अगर आज समलैंगिक शादी को मान्यता मिली तो कुछ साल बाद कोई कहेगा कि परिवार में ही शादी करना उसकी पसंद है. इसे भी कानूनी दर्जा दिया जाये

समलैंगिक शादी को मान्यता देने से कई तरह की परेशानी आयेगी

खबर है कि CJI डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने इस दलील को माना कि समलैंगिक शादी को मान्यता देने से कई तरह की परेशानी आयेगी. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि साथ रह रहे जोड़ों को किसी भी तरह की सामाजिक सुरक्षा न होना सही नहीं है. जजों का कहना था कि ट्रांसजेंडर्स (किन्नर) के लिए ट्रांसजेंडर्स एक्ट बनाया गया है, क्या वैसा ही कुछ समलैंगिक लोगों के लिए भी किया जाये. [wpse_comments_template]

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