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सम्मेद शिखर- मरांगबुरू विवाद : आदिवासियों का पारसनाथ कूच, 10 जनवरी को जनसभा

 
  • लोबिन हेंब्रम, पूर्व सांसद सालखन मुर्मू का दावा, कई प्रदेश के आदिवासी शामिल होंगे
  • सालखन ने विधायक सुदिव्य कुमार सोनू और जिला प्रशासन की बैठक को किया खारिज
  • कहा- सरकार पहले पारसनाथ पहाड़ी को आदिवासियों का धार्मिक स्थल घोषित करे
Ranchi : पारसनाथ को लेकर जिला प्रशासन और झामुमो विधायक सुदिव्य कुमार सोनू की ओर से दोनों धर्मों के लोगों के बीच सहमति के  बावजूद कई आदिवासी नेता पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. झारखंड बचाओ मोर्चा और आदिवासी सेंगल अभियान 10 जनवरी को पारसनाथ स्थित मधुबन पहुंचेंगे. वहां पर आदिवासियों की आम सभा होगी. सेंगल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने कहा कि रविवार को हुई बैठक झामुमो की था, जिसमें कोई हल नहीं निकला. पारसनाथ पहाड़ी संथाल आदिवासियों का तीर्थ स्थल है. वहां पर आदिवासियों का मरांगबुरू पूजा स्थल है. सदियों से यह स्थान आदिवासियों का ही रहा है. इसलिए झारखंड सरकार तत्काल उसे आदिवासियों का तीर्थ स्थल घोषित करे. जैन धर्मियों का तीर्थ स्थल बना देने और पयर्टन गतिविधियों पर रोक लगा देने भर से इसका हल निकलने वाला नहीं है.

जो निर्णय हुआ है, यह स्थाई नहीं- लोबिन

इधर, झामुमो विधायक लोबिन हेंब्रम ने कहा कि हर हाल में 10 जनवरी को पारसनाथ में जुटान होगा. झारखंड सहित कई प्रदेश के आदिवासी वहां पहुंचने वाले हैं. इस सभा में ही अंतिम निर्णय होगा. जिला प्रशासन की पहल का हमलोग स्वागत करते हैं. मगर जो निर्णय हुआ है, यह स्थाई नहीं है. विवाद कायम ही रहेगा. इसलिए पारसनाथ पहाड़ी को आदिवासियों का तीर्थ स्थल घोषित करना ही होगा. इसके बिना हम आदिवासी कुछ भी मानने को तैयार नहीं हैं. इसे भी पढ़ें – 10वीं-">https://lagatar.in/10th-12th-board-exam-cbse-issued-toll-free-number-for-counseling-of-students/">10वीं-

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