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सनातनियों ने नेम-निष्ठा से रखा निर्जला एकादशी व्रत

 
Ranchi : निर्जला एकादशी पर मंगलवार को सनातनी नेम-निष्ठा से व्रत धारण कर श्रीहरि की भक्ति में रमे रहे.पूजा-अर्चना कर अपने इष्ट के श्रीचरणों में श्रद्धा का पुष्प चढ़ाया. मंदिरों में दर्शनार्थियों का सुबह से तांता लगा रहा. माना जाता है कि निर्जला व्रत करने वालों को साल की सारी एकादशियों का पुण्य एक ही बार में मिल जाता है. धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति भी होती है. रोग-शोक और दुखों से छुटकारा मिलता है, जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है. इसी भाव से बड़ी संख्या में व्रतियों ने मंदिरों में दर्शन-पूजन कर मंगल कामनाएं की. इसे भी पढ़ें - रांची">https://lagatar.in/dr-prakash-performed-successful-surgery-for-endometrial-cancer-in-sadar-hospital/">रांची

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तिरुपति बाला जी मंदिर में हुए विशेष अनुष्ठान

निर्जला एकादशी पर तिरुपति बाला जी मंदिर में विशेष अनुष्ठान किये गये. ब्रह्ममुहूर्त में भगवान के विश्वरूप दर्शन के बाद दैनिक पूजन-आरती की गयी. इसके बाद दैनिक पूजन-आरती की गयी. फिर श्रीवेंकटेश्वर के चारों विग्रहों सहित श्रीश्रीदेवी, श्रीभूमिदेवी, चक्रराज सुदर्शन और शठारात्रि (शठकोप) भगवान का मधुर वेदध्वनियों के बीच औषधयुक्त द्रव्यों से महाभिषेक किया गया. श्रृंगार-पूजन कर भक्तों ने फल और खीर आदि का भोग लगाया. नक्षत्र, कुंभ और धृत की आरती उतारी. आचार्यों ने वेद, उपनिषद और स्तोत्रमाला से महास्तुति कर मंगल कामनाएं की. पल्लवी अनुराग, विकास, रुचिता शर्मा, आशीष ने पत्नी अश्विका अग्रवाल इसमें यजमान के रूप में भाग लिया. सत्यनारायण गौतम, गोपेश आचार्य और नारायण दास ने पूजन-अनुष्ठान संपन्न कराया. राम अवतार नारसरिया, प्रदीप नारसरिया, अनूप अम्रवाल, धनश्याम दास शर्मा, रंजन सिंह, प्रशांत चतुर्वेदी ने मुख्य रूप से भागीदारी निभायी. इसे भी पढ़ें - बिहार">https://lagatar.in/nishikant-is-getting-e-natives-beaten-up-by-calling-goons-from-bihar-and-up-supriyo/">बिहार

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