Jamtara News: साढ़े तीन महीने से मानदेय का भुगतान नहीं होने से नाराज जामताड़ा नगर पंचायत के 87 सफाई कर्मियों का गुस्सा गुरुवार को सड़कों पर फूट पड़ा. बकाया मानदेय की मांग को लेकर आक्रोशित सफाई कर्मियों ने कचरे की गाड़ियों के साथ शहर की मुख्य सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान नगर पंचायत कार्यालय से सुभाष चौक, टावर चौक, मुख्य बाजार होते हुए इंद्रा चौक तक जगह-जगह कचरा फैलाकर नगर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
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सफाई कर्मियों के इस विरोध प्रदर्शन से शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई. वहीं, दुर्गापूजा जैसे महत्वपूर्ण त्योहार के दौरान मुख्य सड़कों पर कचरा फैलने से नगर पंचायत की स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं. व्यस्त बाजारों और चौक-चौराहों पर कचरा बिखरने से आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा.
प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मियों ने बताया कि उन्हें पिछले साढ़े तीन महीने से मानदेय नहीं मिला है. बकाया भुगतान के लिए नगर पंचायत अध्यक्ष से लेकर वरीय अधिकारियों तक कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है. लगातार मानदेय नहीं मिलने से उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है.
कर्मियों का कहना है कि वे नियमित रूप से शहर की सफाई कर अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, लेकिन जब मानदेय देने की बारी आती है तो उन्हें इंतजार करना पड़ता है. घर-परिवार चलाने, बच्चों की जरूरतें पूरी करने और रोजमर्रा के खर्चों का इंतजाम करना मुश्किल हो गया है. ऐसे में मजबूर होकर उन्हें विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा.
सफाई कर्मियों ने स्पष्ट कहा कि वे लंबे समय से भुगतान का इंतजार कर रहे हैं. बार-बार शिकायत करने के बावजूद उनकी मांगों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया. अब वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि बकाया मानदेय का भुगतान चाहते हैं. कर्मियों ने चेतावनी दी कि जब तक उनका बकाया भुगतान नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.
त्योहार में सफाई व्यवस्था पर सवाल, जिम्मेदार कौन?
दुर्गापूजा के दौरान शहर को साफ-सुथरा रखना नगर पंचायत की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है. लेकिन मानदेय नहीं मिलने के विरोध में सफाई कर्मियों के सड़कों पर उतरने से व्यवस्था प्रभावित हो गई. सुभाष चौक, टावर चौक और मुख्य बाजार जैसे व्यस्त इलाकों में कचरा फैलने से नगर पंचायत की तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं.
एक तरफ त्योहार में स्वच्छ शहर की उम्मीद है, तो दूसरी तरफ साढ़े तीन महीने से मानदेय के इंतजार में बैठे सफाई कर्मियों की नाराजगी व्यवस्था की हकीकत सामने ला रही है. सवाल यह है कि जब शहर की सफाई व्यवस्था संभालने वाले कर्मियों को समय पर भुगतान नहीं मिलेगा, तो व्यवस्था सुचारू रूप से कैसे चलेगी?
फिलहाल, बकाया मानदेय के भुगतान और प्रदर्शन को लेकर नगर पंचायत प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. अब देखना होगा कि प्रशासन सफाई कर्मियों की मांगों पर कब तक कार्रवाई करता है और शहर की सफाई व्यवस्था को सामान्य बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.
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