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सांसद आदर्श ग्राम योजना : 2021 में जिस गांव को लिया था गोद, सांसद वहां कभी पहुंचे ही नहीं

  • अब तक पूरा नहीं हुआ धर्मपुर के ग्रामीणों का सपना
  • कैसे पूरा होगा पीएम का उद्देश्य, उठे कई सवाल
Gaurav Prakash Hazaribagh : हजारीबाग के सांसद जयंत सिन्हा ने टाटीझरिया प्रखंड के धर्मपुर गांव को 2021 में गोद लिया था. लेकिन गोद के बाद आज तक जयंत सिन्हा के पांव इस गांव में कभी पड़े ही नहीं. ऐसे में समझा जा सकता है कि जयंत सिन्हा गोद लिए हुए गांव को लेकर कितने संवेदनशील हैं. यह कहना है धर्मपुर के ग्रामीणों का. गांव के लोग यह भी बताते हैं कि उन लोगों की चाहत थी कि हजारीबाग के सांसद जयंत सिन्हा ने उनके गांव को गोद लिया है. इस कारण कम से कम उन लोगों से मुलाकात करनी चाहिए थी, और यहां की समस्याओं को जानना चाहिए था. लेकिन उन्होंने जरूरी नहीं समझा, इस कारण दो साल बीत जाने के बाद भी वह गांव में नहीं पहुंचे.

गांव आते, तो समस्याओं के बारे में जान पाते सांसद : मुखिया

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alt="" width="482" height="499" /> गांव की मुखिया कांति देवी कहती हैं कि अगर सांसद उनके गांव में पहुंचते, तभी उनको यहां की समस्याओं के बारे में जानकारी मिलती. उन लोगों ने आपस में बैठक कर कई प्रस्ताव पास किए हैं, लेकिन वह प्रस्ताव अब तक धरातल पर नहीं उतरे. दिलचस्प है कि सरकारी दफ्तरों में बैठकें तो हो रही हैं, लेकिन गांव में बहुत से लोगों को यह भी नहीं पता कि उनका गांव आदर्श बनाने के लिए सांसद ने गोद लिया है.

अब तक धरी है ग्रामीणों को गांव के विकास की आस

गांव को आदर्श बनाने के लिए खेती, पशुपालन, कुटीर उद्योग और रोजगार पर जोर दिया जाना है. वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसद आदर्श ग्राम योजना लागू की थी. इसके तहत सभी सांसदों को एक-एक गांव गोद लेकर उसको आदर्श बनाने को कही थी. स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि उन लोगों को पता चला है कि उनके गांव को सांसद ने गोद लिया है. उन लोगों को विश्वास था कि उनके गांव में सिंचाई के लिए व्यवस्था की जाएगी. लेकिन गांव में सिंचाई के लिए किसी भी तरह की व्यवस्था नहीं है. ऐसे में वे लोग वर्षा जल पर ही निर्भर रहते हैं. उनके गांव में बाजार नहीं है. उन लोगों को अपना उत्पाद बेचने के लिए टाटीझरिया या फिर हजारीबाग जाना होता है. गांव गोद लेने पर उम्मीद थी कि क्षेत्र का चहुंमुखी विकास होगा. लेकिन एक भी योजना धरातल पर नहीं उतरी. उनके गांव के उत्क्रमित उच्च विद्यालय में चारदीवारी का निर्माण जिला परिषद के फंड से किया गया और मनरेगा के तहत एक खेल का मैदान बनाया जा रहा है.

कोरोना का रोना-रोते हैं सांसद प्रतिनिधि

सांसद प्रतिनिधि कैलाशपति सिंह का रोना है कि कोरोना संक्रमण के कारण गांव का विकास नहीं हो पाया और सांसद भी गांव नहीं आ पाए. सांसद आने वाले दिनों में गोद लिए हुए गांव धर्मपुर आएंगे और ग्रामीणों से वार्ता कर विकास योजना को धरातल पर उतारने का काम करेंगे.

जानिए गांवों के विकास के प्रति जनप्रतिनिधियों को क्या है करना

इस योजना में 2016 तक प्रत्येक सांसद को एक-एक गांव को गोद लेकर उसे विकसित करना था. 2019 तक दो और गांवों और 2024 तक आठ गांवों का विकास किया जाना है. पीएम ने राज्य सरकारों से भी अपील की थी कि वे विधायकों को इस योजना के लिए प्रोत्साहित करें, तो हर निर्वाचन क्षेत्र में 5 से 6 और गांव विकसित हो सकते हैं. [wpse_comments_template]

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