Search

 
 
 

संथाल परगनाः कोयला, पत्थर और जमीन के बाद बालू कारोबार में भी अमर मंडल का नाम आया

Ranchi : दुमका में अवैध बालू कारोबार को लेकर अमर मंडल का नाम एक बार फिर चर्चा में है. स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार अवैध बालू कारोबार का नेटवर्क राजनीतिक और कारोबारी रसूख के सहारे संचालित किया जा रहा है. इस नेटवर्क का किंगपिन अमर मंडल को बताया जा रहा है.
 
मयूराक्षी नदी के पास जमा अवैध बालू.
  • - 85 लाख नकद, 134 संपत्तियों के दस्तावेज और 8.94 करोड़ के बैंक लेन-देन की जानकारी ईडी ने कोर्ट में दी थी.

Ranchi : दुमका में अवैध बालू कारोबार को लेकर अमर मंडल का नाम एक बार फिर चर्चा में है. स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार अवैध बालू कारोबार का नेटवर्क राजनीतिक और कारोबारी रसूख के सहारे संचालित किया जा रहा है. इस नेटवर्क का किंगपिन अमर मंडल को बताया जा रहा है.

 

पुराने डंप के चलान से अवैध बालू बनता है वैध

स्थानीय स्तर पर अवैध बालू कारोबार को वैध दिखाने के लिए जेएसएमडीसी के पुराने डंप के चलान का सहारा लिया जा रहा है. रानेश्वर में जेएसएमडीसी की ओर से कराये गये टेंडर को एक कंपनी एमएस ने लिया है. इसी व्यवस्था की आड़ में मयूराक्षी नदी से सटे इलाकों में बड़े पैमाने पर बालू का कारोबार किया जा रहा है.

 

Uploaded Image

मयूराक्षी के निकट अवैध बालू डंप कर ट्रक पर लोड करते.

 

मयूराक्षी नदी से सटे बनियाग्राम, सिलाजोड़, सामपुर, परिहारपुर, एकतला और नौरांगी गांवों में बालू निकासी की बात सामने आ रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार, इन इलाकों में अमर मंडल से जुड़े लोगों का नेटवर्क सक्रिय है. इस कारोबार में स्थानीय युवाओं को भी जोड़ने की बात सामने आयी है.

 

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, नदी घाटों से बालू लेकर निकलने वाले ट्रकों की कथित पासिंग करायी जाती है. एक ट्रक बालू की कीमत करीब 50 से 55 हजार रुपये तक बतायी जा रही है. आरोप है कि इसमें करीब 30 हजार रुपये पासिंग के नाम पर लिये जाते हैं.

 

Uploaded Image

अवैध बालू लदे ट्रक का काफिला.

 

लगातार न्यूज ने जब अमर मंडल का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क किया, तो उन्होंने अपना कारोबार क्रेसर, लोडिग, ट्रस्पोर्ट बताया. साथ ही बालू के कारोबार में शामिल होने की बात से इंकार किया है. लेकिन अमर मंडल से बात करने के कुछ मिनटों बाद ही अवैध बालू कारोबार से जुड़े लोगों का कॉल इस संवाददाता को आने लगे.

 

खान, बसंत, सुब्रतो और पाल का नाम भी चर्चा में

अवैध बालू कारोबार से जुड़े नेटवर्क में कई अन्य लोगों के नाम भी स्थानीय स्तर पर सामने आ रहे हैं. स्थानिय लोगो से मिली जानकारी के अनुसार, खान, बसंत, सुब्रतो और पाल पर मंडल के लिए कारोबार संभालने का आरोप है. हालांकि इस मामले में जब हमने शकील खान से बात की, तो उन्होने कहा कि अमर मंडल के साथ अब काम नहीं कर रहे है. बालू के इस कारोबार में वह शामिल नहीं हैं.

 

कोयला मामले से शुरू हुई ईडी की जांच

अमर मंडल के खिलाफ ईडी की कार्रवाई की शुरुआत अवैध कोयला ढुलाई के मामले से हुई थी. 20 जनवरी 2019 को पोड़ैयाहाट थाना क्षेत्र में बिना वैध दस्तावेज के कोयला लदे ट्रक को पकड़ा गया था. इसके बाद पोड़ैयाहाट थाना कांड संख्या 7/2019 दर्ज किया गया. पुलिस जांच के बाद अमर मंडल सहित अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया. इसी मामले के आधार पर ईडी ने ECIR/RNZO/08/2023 दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की.

 

बाद में इस मामले में अमर मंडल को निचली अदालत से बरी कर दिया गया. इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर ईडी की कार्रवाई और ECIR को रद्द करने की मांग की.

 

85 लाख नकद और 134 संपत्ति दस्तावेज

ईडी ने हाईकोर्ट को बताया था कि 21 नवंबर 2025 को अमर मंडल से जुड़े ठिकानों पर तलाशी ली गयी थी. ईडी ने तलाशी के दौरान 85 लाख रुपये नकद और 134 संपत्तियों के दस्तावेज मिलने की जानकारी अदालत को दी है. दस्तावेजों में गिफ्ट डीड, लीज डीड और सेल डीड शामिल थे.

 

ईडी ने अदालत को यह भी बताया है कि जांच के दौरान अमर मंडल से जुड़े बैंक खातों में करीब 8.94 करोड़ रुपये जमा होने का ब्योरा सामने आया. एजेंसी के अनुसार, इन संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन के स्रोत की जांच की जरूरत है.

 

हाईकोर्ट ने ईडी जांच जारी रखने का रास्ता साफ किया

अमर मंडल ने दलील दी थी कि जिस कोयला कारोबार मामले के आधार पर ईडी ने ECIR दर्ज की थी, उसमें वह बरी हो चुके हैं. इसलिए ईडी की कार्रवाई भी समाप्त की जानी चाहिए. हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. एक सितंबर 2026 को न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज कर दी. अदालत के समक्ष ईडी ने तलाशी में मिली नकदी, संपत्ति दस्तावेज और बैंक लेन-देन का ब्योरा रखा था.

 

फैसले के बाद अमर मंडल के खिलाफ ईडी की जांच जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है. एजेंसी संपत्तियों, नकदी और वित्तीय लेन-देन के स्रोत की जांच आगे बढ़ा सकती है. हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ECIR ईडी का आंतरिक दस्तावेज है. केवल ECIR के आधार पर इस स्तर पर कार्रवाई रद्द नहीं की जा सकती.

बेहतर अनुभव व ज्यादा खबरों के लिए ऐप पर जाएं

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करें
Scan QR Code
Available on App Store & Play Store
Download for Android Download for iOS
Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही