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सारंडा : थोलकोबाद समेत आठ गांवों को अब तक नहीं मिला राजस्व गांव का दर्जा

Kiriburu : नक्सल प्रभावित सारंडा के थोलकोबाद में गुमिदा जातरमा की अध्यक्षता में ग्रामीणों की बैठक हुई. बैठक में बतौर "आस" संयोजक सुशील बारला उपस्थित रहे. उन्होंने बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि थोलकोबाद सहित आठ गांवों को 116 साल पहले 1905 में अंग्रेजों द्वारा बसाया गया था लेकिन दुर्भाग्य कि बात है कि अभी तक उक्त 8 गांव (तिरिलपोसी-1906, नयागांव-1908, करमपदा-1910, दीधा-1911, बिटकिलसोया-1914, बालिबा-1917 एवं कुमडी-1927) को राजस्व गांव का दर्जा नहीं दिया गया है. इस कारण रैयतों का नाम पंजी-2 (जमाबंन्दी) में अंकित नहीं किया गया है. इसे भी पढ़ें : बिहार">https://lagatar.in/promotion-of-31-ips-of-bihar-cadre-patna-ssp-upendra-sharma-became-dig/">बिहार

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इससे यहां के लोगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. वनाधिकार अधिनियम-2006 के तहत सारंडा के गुण्डीजोड़ा-20, राटामाटी-10, नुरदा-18, दुमागदिरी-14 को पट्टा तो दिया गया लेकिन पंजी-2 में रैयतों का नाम अंकित नहीं किया गया है. इसके लिए हमें संगठित होकर संघर्ष करना होगा. हमें ग्राम-सभा को सशक्त बनाना होगा. बैठक को सेवानिवृत्त शिक्षक बेनेडिक्ट लुगुन, गंगाराम होनहग्गा, बोरटो होनहगा, सानियारो नाग, सानिका हेम्ब्रम, ओडे़या देवगम ने भी सम्बोधित किया. [wpse_comments_template]

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