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सरहुल महापर्व : सरना स्थलों पर घड़े में रखा जाएगा पानी, पाहन करेंगे बारिश की भविष्यवाणी

 
Ranchi : आदिवासियों का महापर्व सरहुल पूरे हर्षोल्लास के साथ शुरू हो गया है. रांची के सभी सरना स्थलों को भव्य रूप सजाया गया है. पाहन पूरे दिन उपवास रखकर विधिवत पूजा-अर्चना कर रहे हैं. सोमवार को मुहल्लों के लोग नदी-तालाबों से मछली व केकड़ा पकड़ने निकले. परंपरा के अनुसार, केकड़ों को पूजा के बाद सफेद धागे में बांधकर चूल्हे के ऊपर टांग दिया गया. ऐसा शुभ के लिए किया जाता है. सरना स्थलों पर भजन-कीर्तन और पारंपरिक नृत्य का आयोजन हुआ. सुबह होते ही हातमा, सिरमटोली, देशावली समेत अन्य सरना स्थलों पर महतो पद के लोग पूजा के लिए मिट्टी के घड़े लाए और कोटवारों ने इन घड़ों में पानी भरा. पाहनों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर अनुष्ठान संपन्न किया.

पांच रंग के मुर्गों की दी गई बलि

सरहुल पर्व के पहले पांच रंगों के मुर्गों की बलि चढ़ाई गई, जो विभिन्न देवताओं और परंपराओं का प्रतीक माने जाते हैं. लाल मुर्गा ग्राम देवता के सम्मान में, सफेद मुर्गा सूर्य को, माला मुर्गा खेत-खलिहान की समृद्धि के लिए, काली मुर्गी बुरी आत्माओं को शांत करने के लिए व गोली मुर्गी की बलि पूर्वजों की याद में दी गई.

आदिवासी हॉस्टल व 2 मौजा के पाहन पहुंचे हातमा

सरना स्थल पर मिट्टी के घड़े में पानी भरने की परंपरा निभाने के लिए तीन आदिवासी हॉस्टल और दो मौजा के पाहन नृत्य करते हुए हातमा सरना स्थल पहुंचे. वहां पाहन जगलाल पाहन ने सभी मौजा के पाहनों को पवित्र जल देकर सम्मानपूर्वक विदा किया. इसके बाद सभी पाहनों ने अपने-अपने स्तर से घड़ों में पानी भरा.

घड़ों में पानी के स्तर से होगी बारिश की भविष्यवाणी

इस धार्मिक अनुष्ठान के साथ मंगलवार की सुबह इस साल बारिश की भविष्यवाणी की जाएगी. पाहन सरना स्थल पर घड़ों में रखे पानी व मौसम की स्थिति का आकलन कर यह भविष्यवाणी करेंगे कि इस वर्ष बारिश कैसी होगी. यह भी पढ़ें : म्यांमार">https://lagatar.in/myanmar-earthquake-death-toll-crosses-2000-more-than-3900-injured-35-lakh-people-homeless/">म्यांमार

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