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पलामू में पारंपरिक तरीके से की गई सरहुल पूजा, निकला भव्य जुलूस

Medininagar : नए-नए कोमल पत्तों से भरे सखुआ के पेड़ के नीचे पारंपरिक रूप से गुरुवार की सुबह में पूजा के साथ सरहुल महोत्सव शुरू हुआ, जो देर शाम तक चलता रहा. पलामू प्रमंडलीय मुख्यालय मेदिनीनगर के चियांकी, बारालोटा, सुआ कौड़िया, झाबर, पोखरहा शाहपुर, चांदो, लेस्लीगंज, ललहे, चैनपुर और रजवाडीह में अदिकुरूख सरना समाज के नेतृत्व में सरहुल पूजा की गयी. सभी जगहों पर अलग-अलग पाहन के नेतृत्व में पूजा की गई. जबकि चियांकी में पाहनों की अगुवाई में सरना स्थल पर दाड़ी चुआ से जल यात्रा निकालकर बड़े ही पवित्रता, सादगी और पारंपरिक तरीके से पूजा की गयी. करीब दो घंटे तक पूजा कार्यक्रम चला. पूजा अनुष्ठान समापन के बाद महोत्सव की शुरुआत हो गयी. इस वर्ष पलामू जिले के प्रखंडों 300 गांवों एवं 26 सरना स्थलों पर सरहुल महोत्सव का आयोजन अदिकुरूख सरना समाज के नेतृत्व में किया गया है. सरहुल पूजा के दौरान नए घड़े में पानी भरकर रखा गया. अखड़ा में आदिवासी समुदाय के युवक-युवतियों ने पारंपरिक सरहुल गीत पर नृत्य किया. उसके बाद दोपहर 2:00 बजे से मेदिनीनगर छहमुहान के पास 20 गांवों से पहुंचे आदिवासी समाज के लोगों ने भव्य जुलूस निकाला. इस दौरान सरहुल गीत पर समाज के लोगों ने जमकर नृत्य किया. इधर  पुलिस लाइन में भी सरहुल को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन एसपी रिष्मा रमेशन ने किया. इसे भी पढ़ें : शुभम">https://lagatar.in/if-women-want-a-job-they-will-have-to-walk-14-km-in-four-hours/">शुभम

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