alt="" width="1599" height="899" /> राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर राजभवन से निकलता प्रतिनिधिमंडल[/caption] इसे भी पढ़ें-Omicron">https://lagatar.in/omicron-alert-administration-appeals-to-hotel-operators-give-entry-to-vaccinated-people-in-new-years-party/">Omicron
Alert: होटल संचालकों से प्रशासन की अपील, न्यू इयर पार्टी में वैक्सीनेटेड लोगों को ही दें इंट्री चंपई सोरेन ने कहा, झारखंड के हर प्रमंडल का अपना इतिहास रहा है. यह इतिहास 200 साल पुराना है. जल-जंगल-जमीन का जो संघर्ष कई साल पहले शुरू हुआ, वह आजादी के बाद भी हुआ. अलग झारखंड राज्य बनने के अलावा अपनी पहचान के लिए कई तरह के संघर्ष हुए. खरसांवा गोलीकांड तो जालियावाला बाग कांड से भी बड़ा था. फिर भी आदिवासी अपनी आइडेंटिटी के लिए लड़ते रहे. आज आदिवासी समाज की संस्कृति केवल झारखंड में ही नहीं, बल्कि कई राज्यों के अलावा नेपाल और बांग्लादेश में भी है. अब जरूरत है कि जनजणना में अलग सरना कॉलम की. इसकी मांग को लेकर आज सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मिल राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा है. कांग्रेसी विधायक बंधु तिर्की ने जनगणना में अलग सरना कॉलम आने से होने वाले कई फायदों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि एक तो आदिवासियों की सही तरह से जनगणना हो पाएगी. साथ ही उनके विकास के लिए जो राशि केंद्र (ट्राइबल सबप्लान के तहत) देती है, उसका सही उपयोग हो पाएगा. उन्होंने कहा कि जब हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई की अपनी आइडेंटिटी है, तो वही आइडेंटिटी सरना आदिवासियों के लिए क्यों नहीं हो. जनगणना में अगर इनके लिए अलग कॉलम नहीं होगा, तो वे अपना धर्म कहां बताएंगे. ऐसा नहीं होने से लाखों आदिवासियों के साथ न्याय नहीं हो पाएगा. इसे भी पढ़ें-शाम">https://lagatar.in/evening-news-diary-23-december-hec-staff-on-the-street-12-showcause-to-jee/">शाम
की न्यूज डायरी।23 दिसंबर। सड़क पर HEC कर्मचारी।12 JEE को शोकॉज।पं बंगाल में 29 बच्चों को कोविड। लुधियाना कोर्ट ब्लास्ट में 2 मरे। बिहार के अलावा कई वीडियो। [wpse_comments_template]
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