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सरना धर्म कोड : झारखंड की राह पर पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़, 2024 के लोकसभा चुनाव में बनेगा मुद्दा

Ranchi : वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में सरना धर्म कोड लागू करने की मांग एक अहम मुद्दा रहेगा. गैर भाजपा शासित राज्यों में सरना धर्म कोड की मांग तेजी से उठ रही है. झारखंड की सत्तारूढ़ हेमंत सोरेन सरकार ने सरना धर्म कोड लागू कराने को लेकर एक प्रस्ताव 11 नवंबर 2020 को झारखंड विधानसभा से पारित किया था. यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया. हालांकि अभी तक इसे मंजूरी नहीं मिली है. झारखंड की तर्ज पर अब पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में भी अब सरना धर्म कोड की मांग उठने लगी है.

पश्चिम बंगाल लाएगी प्रस्ताव, छत्तीसगढ़ के मंत्री ने भी की मांग

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने फैसला किया है कि आदिवासियों के सरना धर्म को मान्यता देने के लिए राज्य सरकार 13 फरवरी को विधानसभा में प्रस्ताव पेश करेगी. वहीं, छत्तीसगढ़ के आदिवासी मामलों के मंत्री कवासी लखमा ने आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड की मांग की है.

धार्मिक आजादी की रक्षा के लिए कर रहे हैं मांग

झारखंड सहित पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, ओड़िशा और बिहार में रहने वाले आदिवासी समुदाय का बड़ा तबका अपने आपको सरना धर्म के अनुयायी के तौर पर मानता है. सरना आदिवासी इस मांग को लेकर सालों से संघर्ष कर रहे हैं. वो मांग कर रहे हैं कि होने वाली अगली जनगणना में उनके आगे हिंदू न लिखा जाए. हिंदू धर्म से उनका कोई लेना-देना नहीं है और उनका धर्म सरना है. इनका तर्क है कि इससे आदिवासियों की संस्कृति और धार्मिक आजादी की रक्षा की जा सकेगी. साथ ही आदिवासियों को एक अलग धर्म की पहचान मिल पाएगी. इसे भी पढ़ें – सीबीएसई">https://lagatar.in/cbse-10th-and-12th-board-exam-admit-card-released/">सीबीएसई

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