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सिरमटोली सरना स्थल पर काम रोके जाने की मांग को लेकर राज्यपाल और सीएम को आवेदन देंगे सरना संगठन

Ranchi : सिरमटोली सरना स्थल का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस धार्मिक स्थल में पांच मंजिला भवन बनाने का विरोध कई सरना संगठन के लोग कर रहे हैं. न्यू गार्डेन सरना समिति, भारत मुंडा समाज, जनजातीय सुरक्षा मंच, मुंडा समाज विकास समिति, केंद्रीय सरना पूजा समिति,आदिवासी नवयुवक संघ सरना समिति के लोग विरोध करने वालों में शामिल हैं.               झारखंड">https://lagatar.in/jharkhand-news/">झारखंड

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सरना संगठन के लोगों ने आज रविवार को हातमा स्थित जगलाल पाहन के आवास में आपात कालीन बैठक बुलाई. बैठक में खूंटी, सिरमटोली, कडरू, ओरमांझी,मोराहबादी, कांके के लोग शामिल हुए.

सिरमटोली सरना स्थल एक धार्मिक स्थल है

सरना धर्म को मानने वाले लोगों ने कहा कि सरना स्थल पर काम रोके जाने की मांग को लेकर सीएम हेमंत सोरेन और राज्यपाल को लिखित रूप से आवेदन देंगे. कहा कि सिरमटोली सरना स्थल एक धार्मिक स्थल है. यहां प्रकृति का वास रहता है. यह स्थल सरना मां की आस्था से जुड़ा है. यहां प्रकृति पूजक आदिवासी समाज के लोग माथा टेकने आते हैं. लाखों लोग सरना मां से मन्नत मांगने यहां पहुंचते हैं. खास कर सरहुल पर्व पर राज्य भर के आदिवासी समाज के लाखों लोग यहां जुटते हैं. पूजा पाठ करते हैं, यहां प्रत्येक गुरुवार को भजन कीर्तन होता है.

धार्मिक स्थल में किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती

बैठक में कहा गया कि आदिवासियों के धार्मिक स्थल में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती. लोगों ने कहा कि सौंदर्यीकरण किया जाना जरूरी है, लेकिन आदिवासी समाज के कस्टम लॉ में पांच मंजिला भवन बनाना वर्जित है. आरोप लगाया कि यहां सीएनटी एक्ट का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है. इसका पुरजोर तरीके से विरोध किया जायेगा. बैठक में मौजूद लोगों का कहना था कि सिरमटोली सरना स्थल पर पहला अधिकार स्थानीय लोगों का है.

दूसरे मौजा के लोग इस स्थल पर अपनी दावेदारी नहीं कर सकते

यहीं के लोग सिरमटोली में सौंदर्यीकरण को लेकर सरकार को प्रस्ताव भेज सकते है. साफ कहा गया कि दूसरे मौजा के लोग यहां पूजा पाठ तो कर सकते हैं, लेकिन इस स्थल पर अपनी दावेदारी नहीं कर सकते. .जब तक सिरमटोली के स्थानीय लोग ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित नहीं करते, तब तक सरना स्थल पर काम नहीं हो सकता. निर्माण कार्य को लेकर कहा कि यहां किसी भी प्रकार की आदिवासी परंपरा, रीति रिवाजों का पालन नहीं किया जा रहा है. [wpse_comments_template]

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