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व्यंग्य: तुम मुझे लाइक दो, मैं तुम्हें रील दूंगा

छात्रों की समस्या का समाधान मिल गया है. शिव खेड़ा ने कहा था- जीतने वाले कोई नया काम नहीं करते, वे वही काम नए तरीके से करते हैं. प्रधान सेवक ने भी अपनी गलती समझ ली. व्हाट्सअप से बात नहीं बनेगी. प्रचार हम नए तरीके से करेंगे. पार्टी को इंस्टा पर जाना होगा.  वैज्ञानिक हर समस्या का वैज्ञानिक समाधान खोजता है.
 

Manish Singh


छात्रों की समस्या का समाधान मिल गया है. शिव खेड़ा ने कहा था- जीतने वाले कोई नया काम नहीं करते, वे वही काम नए तरीके से करते हैं. प्रधान सेवक ने भी अपनी गलती समझ ली. व्हाट्सअप से बात नहीं बनेगी. प्रचार हम नए तरीके से करेंगे. पार्टी को इंस्टा पर जाना होगा. 


वैज्ञानिक हर समस्या का वैज्ञानिक समाधान खोजता है. समाजशास्त्री, समाज के विभिन्न वर्गों की डायनामिक्स में समाजशास्त्रीय विश्लेषण करता है. एक बार तो हमारे यहां इकॉनमिस्ट प्रधानमंत्री भी हुआ. मुंडी झुकाए खटता रहा, यह सोचकर, कि इकॉनमी सुधर जाए, तो देश तर जाएगा. गलत था. जेब में पैसे हों न हो, प्रचार भरपूर होना चाहिए.


तो देश ने उसकी जगह प्रचारक चुना. अब जाहिर है, प्रचारक हर संकट में यही सोचेगा कि उसके प्रचार में कहां कमी रह गयी. सो पेपर लीक और एजुकेशन सिस्टम कोलैप्स हुआ, तो निष्णात प्रचारक ने तुरंत पकड़ लिया- मंत्रीगण इंस्टा पर पिछड़ गए हैं. चलो इंस्टा!!


ठीक वैसे ही जैसे सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिंद फौज के सेनानियों को कहा था- चलो दिल्ली. सोचता हूं, अगर वे आज भाजपा सरकार में मंत्री होते, तो क्या कहते. शायद रात तक उनका ट्वीट आता- तुम मुझे लाइक दो, मैं तुम्हे रील दूंगा. उधर लोकमान्य तिलक कहते - स्वरील मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं वायरल होकर रहूंगा. 


लालबहादुर शास्त्री, जय जवान, जय किसान नहीं कहते. इनका स्टेटस होता- जय रील, जय इंस्टाग्राम!! उधर, स्वामी विवेकानंद, हालांकि इनके साथ मंत्री न बनते, लेकिन जबरन कल्पना कर ही लें, तो उनका नारा होता - उठो, जागो, रील बनाओ और वायरल होने तक मत रुको.


दरअसल, फेसबुक, ट्विटर, थ्रेड्स, कू, इंस्टा- इतने सारे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हो गए हैं, कि सरकार के लोग करें तो क्या क्या करें?  दरअसल, वन नेशन, वन प्लेटफॉर्म की नीति लाने का यही वक्त है.


सरदार पटेल ने जिस तरह देशी रियासतों का एकीकरण किया था, मोदी जी को चाहिए कि सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म का एकीकरण कर दें.  वन लॉगिन, वन पासवर्ड. ईज ऑफ बीइंग सोशल..मोट्टो यही - भारत को एक इंस्टा अकाउंट में पिरोऊंगा.


आठवीं सदी में शंकराचार्य ने भी कहा था - जगत मिथ्या है, इंस्टा ही सत्य है. सच्चा हिन्दू वही है, जिसने इंस्टा पर मोदी जी को फॉलो किया है. दरअसल आधार, पासपोर्ट, वोटर आईडी सबके खारिज होने के बाद इंडियन सिटिजनशिप का कोई प्रमाण होगा, तो वह इंस्टा पर आपकी प्रधान सेवक की प्रोफाइल की फॉलोइंग शिप होगी.


नागरिक को अपना आधार नंबर, इंस्टा से लिंक करना होगा. जिसमें रोज हर पोस्ट लाइक करके, आप अपनी सिटिजनशिप रिन्यू करेंगे. फॉलो न करने वाले SIR में कट जाएंगे, फिर अपना और अपने बाप का इंस्टा आईडी लेकर BLO के चक्कर लगाते रहना. 


लेकिन बेहतर समर्थन का ईनाम भी मिलेगा. पिछली बार एक देशभक्त मुस्लिम को, इसीलिए तो राष्ट्रपति बनाया गया था. याद है? उन्होंने मशहूर बयान दिया था - रील्स वो नहीं जो फीड में आते हैं, सच्ची रील्स वो हैं जो स्क्रॉल करने नहीं देते. 


आदेश के बाद इंस्टा लोक में बंदनवार सजे हुए हैं. हर्ष का माहौल है. सकल कूचों में गीत गूंज रहा है- जो राम को लाये हैं.. वही रील को लायेंगे.

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