- झारखंड के पारंपरिक वाद्ययंत्रों और उसे बनाने वालों को बचाने की पहल
कम से कम एक वाद्य यंत्र को जरूर खरीदें- नंदलाल नायक
नंदलाल नायक ने कहा कि बाघों को बचाने की बात तो होती है, लेकिन संस्कृति और इसके रक्षकों को बचाने की बात नहीं होती. झारखंडी वाद्य यंत्र को बनाने वाले लोगों की स्थिति काफी खराब है. एक मांदर बनाने में कम से कम उन्हें एक सप्ताह का समय लगता है. लेकिन उन्हें महज 500 रूपए ही मिलते हैं. उनकी स्थिति को सुधारने के लिए ये संकल्प लिया गया है. लोगों से अपील है कि कम से कम एक वाद्य यंत्र को जरूर खरीदें, ताकि इन लोगों का हौसला बढ़ सके और हमारी संस्कृति बची रहे. नंदलाल ने कहा कि इसके लिए डिजिटल प्लेटफार्म की घोषणा भी जल्द होगी और नंबर भी जारी किए जाएंगे, जिसके माध्यम से राज्य के किसी भी हिस्से से लोग वाद्य यंत्र खरीद सकेंगे. कार्यक्रम में दिवंगत नागपुरी गीतकार मदन नायक को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी. कार्यक्रम में सांस्कृतिक कला से जुड़े पद्मश्री मुकुंद नायक, पदdमश्री मधु मंसूरी, सुशांतो महापात्रा, वरिष्ठ पत्रकार विजय पाठक और शंभुनाथ चौधरी सहित कई लोग शामिल रहे. इसे भी पढ़ें – झारखंड">https://lagatar.in/jharkhand-assembly-committee-will-visit-6-districts/">झारखंडविधानसभा की समिति करेगी 6 जिलों का भ्रमण [wpse_comments_template]

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