Ranchi : स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) बैक मैनेजर मनोज कुमार ने जालसाजी कर मुर्दों का जीवन प्रमाण पत्र बनाया. फिर लंबे समय से बंद पड़े पेंशन आकाउंट के एक्टिवेट किया और उसमें आया पैसा अपने रिश्तेदारों व करीबी लोगों के खाते में ट्रांसफर किया. साहिबगंज में पदस्थापन के दौरान की इस जालसाजी का खुलासा ईडी की जांच में हुआ है.
ईडी द्वारा की गयी जांच में पाया गया है कि स्टेट बैंक के मनोज कुमार ने साहिबगंज जिले में अपने पदस्थापन के दौरान बड़े पैमाने पर जालसाजी कर बैंक को करीब पांच करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया. बैंक मैनेजर ने जालसाजी के लिए कई तरह का तरीका अपनाया. उसमें से एक तरीका पेंशन अकाउंट से पैसा निकाल कर अपने रिश्तेदारों व करीबी लोगों के खाते में ट्रांसफर करना है. ईडी ने पेंशनरों की तलाश के लिए उनके पते पर पत्र भेजा. लेकिन डाक विभाग ने यह कहते हुए पत्र लौटा दिया कि पता सही नहीं है.
डाक विभाग ने जिन पेंशनभोगियों को भेजे गये पत्रों को लौटा दिया, उसमें परिखन यादव, चंद्र पोखराल, हर्ष बहादुर मागर, रवि प्रसाद गौतम, राम चंद्र सिंह, सुशील ओझा सहित अन्य लोगों के नाम शामिल है. जांच के दौरान बैंक ने यह सूचना दी कि इन बैंक खातों को वर्ष 2020 से होल्ड पर रखा गया है. किसी ने अब तक इन खातों पर दावा नहीं किया है.
जालसाजी कर पेंशन आकाउंट से किये ट्रांसफर के कुछ उदाहरण
- पानमती के पेंशन अकाउंट से अपने पत्नी नीतू कुमारी के खाते में 25 हजार ट्रांसफर किया.
- मृत पेंशनधारी तेतर देवी और सुप्रभा देवी के पेंशन आकाउंट को जीवन प्रमाण पत्र देकर एक्टिव किया और 12 हजार ट्रांसफर किया.
- गुरूंग बहादुर के नाम पर फर्जी तरीके से अकाउंट खोला. इसके मृत पेंशनर वाली हेंब्रम के खाते से 7000 रुपये ट्रांसफर किया.
- मृत गंगा देवी के अकाउंट में 88 हजार रुपये ट्रांसफर किया.
- के. बहादुर के नाम पर फर्जी अकाउंट बना कर बदर सिंह के खाते मे 10 हजार ट्रांसफर किया.
काफी कोशिश के बाद चार पेंशन अकाउंट धारकों के पारिवारिक सदस्य मिले. पूछताछ के दौरान इन लोगों ने यह स्वीकार किया कि पेंशनभोगियों की मौत बहुत पहले हो गयी है. बहुत खोजबीन के बाद सिर्फ शांति देवी नामक एक पेंशन अकाउंट होल्डर जीवित मिली. बैंक मैनेजर ने जालसाजी कर शांति देवी के खाते से भी पैसा निकाल लिया.
मनोज कुमार ने 17 पेंशन खातों में जालसाजी कर 4.71 लाख रुपये अपनों के खाते में ट्रांसफर किया. इन सभी ट्रांसफरों के पूरे वाउचर जांच के दौरान नहीं मिले. जांच के दौरान मिले कुछ वाउचरों पर किसी का हस्ताक्षर नहीं था. इसका अर्थ यह कि बैंक मैनेजर ने अपने पद का दुरूपयोग किया.
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