NewDelhi : केंद्र की मोदी सरकार और सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) के बीच तल्खियां लगातार बढती ही जा रही है. जानकारों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अप्रत्याशित कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर यह जानकारी साझा कर दी है कि कॉलेजियम द्वारा हाईकोर्ट में जज के तौर पर नियुक्ति के लिए अनुशंसित नामों को केंद्र सरकार ने क्यों ठुकरा दिया. SC कॉलेजियम vs हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति से संबंधित खुफिया एजेंसी रॉ और आईबी (IB) की रिपोर्ट भी सार्वजनिक कर दी है, इसे अप्रत्याशित माना जा रहा है. इसे भी पढ़ें : बहुविवाह,">https://lagatar.in/sc-to-set-up-new-five-member-bench-to-hear-polygamy-nikah-halala-practice/">बहुविवाह,
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संविधान यौन स्वतंत्रता की गारंटी देता है
Bar and Bench की एक रिपोर्ट के अनुसार कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट में जज के तौर पर नियुक्ति के लिए एडवोकेट सौरभ कृपाल का नाम भेजा था. केंद्र सरकार ने उनके नाम को रिजेक्ट करते हुए तर्क दिया कि वो समलैंगिक (Gay) हैं. वे पक्षपाती हो सकते हैं. यह भी कहा कि उनका पार्टनर विदेशी है. कॉलेजियम ने केंद्र सरकार से असहमति जताते हुए इसका जवाब दिया कि संविधान यौन स्वतंत्रता की गारंटी देता है. कहा कि सौरभ कृपाल की नियुक्ति से दिल्ली हाईकोर्ट में डाइवर्सिटी आयेगी. जान लें कि सीनियर एडवोकेट सौरभ कृपाल पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बीएन कृपाल के बेटे हैं. इसे भी पढ़ें : रोजगार">https://lagatar.in/employment-fair-pm-modi-handed-over-appointment-letters-to-newly-appointed-71-thousand-employees-in-government-departments/">रोजगारमेला : पीएम मोदी ने सरकारी विभागों में नवनियुक्त 71 हजार कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र सौंपे
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