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इस मामले में पिछले साल दो नवंबर को सुनवाई की गयी थी
सीजेआई ने कहा, पांच न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष यह बहुत महत्वपूर्ण मामला लंबित है. हम एक पीठ का गठन करेंगे और इस मामले पर गौर करेंगे. बता दें कि इस मामले में पिछले साल दो नवंबर को सुनवाई की गयी थी. पिछली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 30 अगस्त 2022 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) को जनहित याचिकाओं में पक्षकार बनाया था और उनसे जवाब मांगा था. तत्कालीन संविधान पीठ की अध्यक्षता न्यायमूर्ति बनर्जी कर रही थीं. न्यायमूर्ति गुप्ता, न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया इसमें शामिल थे. इसे भी पढ़ें : रोजगार">https://lagatar.in/employment-fair-pm-modi-handed-over-appointment-letters-to-newly-appointed-71-thousand-employees-in-government-departments/">रोजगारमेला : पीएम मोदी ने सरकारी विभागों में नवनियुक्त 71 हजार कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र सौंपे
SC ने जुलाई 2018 में उनकी याचिका पर विचार किया था
न्यायमूर्ति बनर्जी और न्यायमूर्ति गुप्ता पिछले साल क्रमशः 23 सितंबर और16 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो गये, जिससे बहुविवाह और निकाह हलाला की प्रथाओं के खिलाफ आठ याचिकाओं पर सुनवाई के लिए संविधान पीठ के पुनर्गठन की आवश्यकता पड़ी. उपाध्याय ने अपनी जनहित याचिका में बहुविवाह और निकाह हलाला को असंवैधानिक और अवैध घोषित करने का निर्देश देने का आग्रह किया है. SC ने जुलाई 2018 में उनकी याचिका पर विचार किया था और इस मामले को संविधान पीठ के पास भेज दिया था, जो पहले से ही ऐसी ही याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी. इसे भी पढ़ें : जम्मू-कश्मीर">https://lagatar.in/jammu-and-kashmir-bharat-jodo-yatra-moves-forward-sanjay-raut-joins-said-the-atmosphere-in-the-country-is-changing-rapidly/">जम्मू-कश्मीर: भारत जोड़ो यात्रा आगे बढ़ी, संजय राउत हुए शामिल, कहा, देश में माहौल तेजी से बदल रहा है [wpse_comments_template]

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