साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ईडी के जांच, गिरफ्तारी और संपत्ति को अटैच करने के अधिकार को सही ठहराया है. इस क्रम में SC ने जांच के दौरान ED, SFIO, DRI अधिकारियों (पुलिस अफसर नहीं) के सामने दर्ज बयानों को वैध सबूत माना है. बेंच ने कहा, आरोपी को ECIR (शिकायत की कॉपी) देना भी जरूरी नहीं है. यह काफी है कि आरोपी को यह जानकारी दे दी जाये कि उसे किन आरोपों के तहत गिरफ्तार किया जा रहा है.#UPDATE">https://twitter.com/hashtag/UPDATE?src=hash&ref_src=twsrc%5Etfw">#UPDATE
— ANI (@ANI) July">https://twitter.com/ANI/status/1552166196640124928?ref_src=twsrc%5Etfw">July
| Supreme Court upholds validity of various provisions of Prevention of Money Laundering Act (PMLA).
27, 2022
242 याचिकाओं पर SC का अहम फैसला, प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत ED को गिरफ्तारी का हक
NewDelhi : ED की गिरफ्तारी की प्रक्रिया मनमानी नहीं है. खबर है कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के कई प्रावधानों की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया. जान लें कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत गिरफ्तारी के ED के अधिकार को बरकरार रखा है.

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