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रांची: वैश्य मोर्चा ने दिया एकदिवसीय चेतावनी महाधरना

Ranchi: झारखंड प्रदेश वैश्य मोर्चा द्वारा अपनी लंबित मांगों को लेकर रविवार को मोरहाबादी स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रतिमा के समक्ष एकदिवसीय चेतावनी महाधरना का आयोजन केंद्रीय अध्यक्ष महेश्वर साहु की अध्यक्षता में हुआ. महाधरना में विभिन्न जिलों से आये वैश्य मोर्चा के केंद्रीय पदधारी, जिला अध्यक्ष और प्रमुख सदस्य शामिल हुए. धरना कार्यक्रम में प्रस्ताव पारित कर घोषणा की गई कि 8 अक्टूबर को कैबिनेट की बैठक में वैश्य मोर्चा की मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो आगामी विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन के खिलाफ अभियान चलाने पर विचार करेगी. सोमवार को फिर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्यपाल समेत मंत्रियों को ज्ञापन सौंपा जायेगा. केंद्रीय अध्यक्ष महेश्वर साहु ने कहा कि दर्जनों बार धरना-प्रदर्शन करके, और प्रतिनिधिमंडल मिल कर मांग-पत्र सौंपा गया है, लेकिन अफसोस की बात है कि अब तक वैश्य समाज को सभी सरकारों ने उपेक्षित करने, हाशिए पर डालने का काम किया है. उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में कहा था कि सत्ता में आने के बाद वे लागू करेंगे. मुख्यमंत्री को 31 जुलाई को वैश्य मोर्चा का उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल ने ज्ञापन सौंपा था. आज धरना कार्यक्रम के माध्यम से वैश्य मोर्चा मांग करना चाहती है कि 8 अक्टूबर को होने वाली कैबिनेट की बैठक में हमारी मांगों पर विचार किया जाये. अन्यथा वैश्य मोर्चा आने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी रणनीति बनायेगी और ठोस निर्णय लेगी. चेतावनी महाधरना में समाजसेवी आदित्य विक्रम जायसवाल, मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हीरानाथ साहु, वरीय उपाध्यक्ष मोहन साव, रामसेवक प्रसाद, सुरेश साहु, संजीव चौधरी, केंद्रीय उपाध्यक्ष सह हाइकोर्ट के अधिवक्ता योगेंद्र प्रसाद, सहदेव चौधरी, परशुराम प्रसाद, उप प्रधान महासचिव उपेन्द्र प्रसाद, अशोक गुप्ता, केंद्रीय महासचिव कपिल प्रसाद साहु, केंद्रीय सचिव दिलीप प्रसाद, रामाशंकर राजन, संगठन महासचिव कृष्णा साहु, संगठन सचिव अनिल वैश्य, जगदीश साहु, मीडिया प्रभारी राहुल कुमार साहु, केंद्रीय सदस्य नरेश साहु, राजेन्द्र साहु, महावीर साहु, जिला अध्यक्ष रोहित कुमार साहु, युवा मोर्चा अध्यक्ष हलधर साहु, सचिव आदित्य पोद्दार, छात्र मोर्चा अध्यक्ष युवराज साहु, अविनाश कुमार, नीलू साहु आदि शामिल थे.

वैश्य मोर्चा की मांग

इसके तहत मांग किया गया ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण देने, शून्य जिलों में आरक्षण की व्यवस्था लागू करने, जाति आधारित जनगणना, वैश्य आयोग का गठन, छोटे दुकानदारों की 10 लाख रुपये तक की ऋण माफी, वैश्यों की लूटी गई जमीन वापसी, वैश्यों को झूठे केस में फंसाने, प्रताड़ित करने आदि मांगें रखी गई. इसे भी पढ़ें - हिंदू">https://lagatar.in/hindu-society-will-remain-safe-only-when-it-unites-by-removing-caste-language-and-regional-disputes-mohan-bhagwat/">हिंदू

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