Galudih (Prakash Das): बाजार में इन दिनों स्वादिष्ट मौसमी फुटू (बारिश के दिनों में स्वतः उगने वाला मशरूम) की बहुत मांग है. आसपास के ग्रामीण जंगल क्षेत्र से मशरूम गालूडीह बाजार पहुंच रहा है. मांग अधिक और आवक कम होने से इन दिनों मशरूम की कीमत चार सौ रुपये किलो है. महंगा होने के बावजूद ग्राहक जमकर मशरूम खरीद रहे हैं. इसे भी पढ़ें: चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-in-the-indoor-badminton-stadium-two-junior-players-accuse-the-senior-of-molesting/">चाईबासा
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alt="" width="600" height="277" /> गालूडीह पासिंग ब्रिज के नीचे मशरूम बेचती महिला.[/caption] झाटीझरना पंचायत के डायनमारी गांव से करीब 50 किलोमीटर दूर से आई महिला विक्रेता तनु बाला कर्मकार ने बताया कि स्थानीय भाषा में प्रचलित भिंभोरा फुटू सौ रुपये पाव में बिक रहा है. वैसे मांग होने के कारण बेचने में दिक्कत नहीं है. बाजार में आवक कम और ग्राहक ज्यादा होने से इसे ऊंचे दाम में भी सहजता से ग्राहक खरीद रहे हैं.
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मांग होने के कारण बेचने में दिक्कत नहीं
[caption id="attachment_367464" align="aligncenter" width="600"]alt="" width="600" height="277" /> गालूडीह पासिंग ब्रिज के नीचे मशरूम बेचती महिला.[/caption] झाटीझरना पंचायत के डायनमारी गांव से करीब 50 किलोमीटर दूर से आई महिला विक्रेता तनु बाला कर्मकार ने बताया कि स्थानीय भाषा में प्रचलित भिंभोरा फुटू सौ रुपये पाव में बिक रहा है. वैसे मांग होने के कारण बेचने में दिक्कत नहीं है. बाजार में आवक कम और ग्राहक ज्यादा होने से इसे ऊंचे दाम में भी सहजता से ग्राहक खरीद रहे हैं.
मेहनत अधिक होने के कारण दाम भी अधिक रहता है
भिंभोरा फुटू खासकर जंगल से लाया जा रहा है. इस तरह के मशरूम स्वाभाविक रूप से उग आते हैं. ऐसे जगहों पर जहरीले कीड़े और सर्पों का भी भय बना रहता है, जिसके चलते मशरूम निकालने वाले बड़ी सावधानी से इसे एकत्र करते हैं. मेहनत अधिक होने के कारण इसका दाम भी अधिक रहता है. इसे भी पढ़ें: चाकुलिया">https://lagatar.in/chakulia-the-elephants-broke-the-grill-of-the-lamp-but-could-not-enter-to-eat-the-grains/">चाकुलिया: हाथियों ने लैम्पस का ग्रिल तोड़ा, लेकिन अनाज खाने अंदर नहीं घुस सके [wpse_comments_template]
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