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सरला बिरला विश्वविद्यालय में सेमिनार, स्वामी अंतरानंद जी ने कहा- योग आत्मानुशासन का कारक

  • सेमिनार का विषय था - लाइफ स्टाइल डिसऑर्डर्स सॉल्यूशन विद योगा एंड अल्टरनेटिव थेरेपी 
Ranchi : सरला बिरला विश्वविद्यालय में बुधवार को दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया. सेमिनार विश्वविद्यालय के योग एंड नेचरोपैथी विभाग द्वारा किया गया. लाइफ स्टाइल डिसऑर्डर्स सॉल्यूशन विद योगा एंड अल्टरनेटिव थेरेपी विषय आयोजित सेमिनार के मुख्य अतिथि थे रामकृष्ण मिशन आश्रम के स्वामी अंतरानंद जी महाराज. उन्होंने भारतीय संस्कृति की परंपराओं की चर्चा की और बताया कि योग क्या है. लाइफ स्टाइल डीसऑर्डर के बारे में विस्तृत जानकारियां साझा की. कहा कि समस्या है, तो समाधान भी है. योग आत्मानुशासन का कारक है. अनुशासित जीवन शैली अपनाना योग का संदेश है. योग केवल शारीरिक अनुशीलन ही नहीं, यह हमारे आंतरिक मन- बुद्धि और आत्मा के अनुशासन का कारक भी है. शरीर, मन -भावना का संतुलन ही योग है. चित्त, चिंतन पर नियंत्रण करते हुए प्रकृति के अनुसार जीवन शैली अपनाए जाने की आवश्यकता है.

कुलपति ने प्राकृतिक कंपोनेंट्स की उपयोगिता व महत्व की व्याख्या की

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गोपाल पाठक ने लाइफ स्टाइल डिसऑर्डर की विस्तृत चर्चा करते हुए 1950 से लेकर अभी तक विकास के बढ़ते क्रम के बारे में बताया. साथ ही उन्होंने प्राकृतिक कंपोनेंट्स की उपयोगिता व महत्व की भी व्याख्या की. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव विजय कुमार सिंह, डॉ नीलिमा पाठक, डॉ संदीप कुमार, हरी बाबू शुक्ला, डॉ सुबानी बाड़ा, डॉ राधा माधव झा, आशुतोष द्विवेदी, अजय कुमार, प्रवीण कुमार, डॉ पार्थ पॉल, प्रो अमित गुप्ता, डॉ रिया मुखर्जी, डॉ पूजा मिश्रा, डॉ नम्रता चौहान, डॉ भारद्वाज शुक्ला, डॉ अर्चना मौर्य, अंकित अनुभव, अमरेंद्र दत्त द्विवेदी, आकांक्षा कुमारी, अंजना सिंह और ओम प्रकाश शामिल रहे.

हमारा शरीर प्रकृति का अनुपम व अद्वितीय उपहार : प्रो. टुलु सरकार

रांची विश्वविद्यालय के योग विभाग की पूर्व डायरेक्टर प्रो टुलु सरकार ने जीवन व जीवन के उद्देश्य और शरीर के महत्व की चर्चा की. कहा कि हमारा शरीर प्रकृति का अनुपम व अद्वितीय उपहार है. इसमें ऑटोमेटिक मेंटेनेंस की व्यवस्था है. आज की भाग- दौड़ भरी जिंदगी में हमारी जीवन शैली अव्यवस्थित हो गयी है. इससे व्यावहारिक जीवन में कई प्रकार की शारीरिक समस्याएं एवं मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है. हमने बीमारियों को स्वयं आमंत्रित किया है. उन्होंने कहा कि योग जीवन जीने की पद्धति है. योग केवल शारीरिक क्रिया नहीं अपितु ज्ञान, विज्ञान एवं मानसिक क्रिया है. योग के माध्यम से जीवन में काफी कुछ सकारात्मक परिवर्तन संभव है. उन्होंने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को ब्रह्म मुहूर्त में जागने की विशेषता को बताया. इसे भी पढ़ें – रिम्स">https://lagatar.in/free-facility-of-liposuction-will-be-available-in-plastic-surgery-department-of-rims/">रिम्स

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