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हजारीबाग: आईसेक्ट विवि में पार्थेनियम घास उन्मूलन पर संगोष्ठी

 
Hazaribagh: आईसेक्ट विश्वविद्यालय के तरबा-खरबा स्थित मुख्य कैंपस सभागार में पार्थेनियम घास जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत पार्थेनियम घास उन्मूलन को लेकर एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. मुख्य वक्ता केंद्रीय वर्षाश्रित भूमि चावल अनुसंधान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ शिवमंगल प्रसाद, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पीके नायक, कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद, डीन एडमिन डॉ एसआर रथ, डीन एकेडमिक डॉ एमके मिश्रा, कृषि विभाग के संकायाध्यक्ष डॉ अरविंद कुमार सहित अन्य ने कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की. स्वागत भाषण से पूर्व कृषि विभाग डीन डॉ अरविंद कुमार ने मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता, कुलपति, कुलसचिव सहित सभी अतिथियों का स्वागत किया.

जानकारी ही समस्या का समाधान हैः डॉ शिवमंगल प्रसाद

मुख्य वक्ता व प्रधान वैज्ञानिक डॉ शिवमंगल प्रसाद ने पार्थेनियम घास के भारत आगमन के इतिहास से लेकर उन्मूलन से लेकर प्रबंधन तक विस्तार पूर्वक मौजूद किसानों व विद्यार्थियों को जानकारी दी. उन्होंने कहा कि जानकारी ही समस्या का समाधान है. कुलपति डॉ पीके नायक ने कहा कि दरअसल ऐसी संगोष्ठी विद्यार्थियों के साथ-साथ किसानों के लिए भी लाभप्रद हैं. उन्होंने कहा कि उन्नत खेती न केवल पैदावार बढ़ाता है, बल्कि फसल की गुणवत्ता के लिए भी मददगार है. कुलसचिव ने बताया कि पार्थेनियम घास या गाजर घास एक नुकसानदायक घास है, जिसके रहने से फसल को नुकसान पहुंचता है. जानकारी के अभाव में कई बार हम ऐसे घास को छोड़ देते हैं, नतीजतन फसल का नुकसान हो जाता है. ऐसे में संगोष्ठी या अन्य माध्यमों से मिली जानकारी हमारे लिए मुफीद साबित होती है.

डॉ मनोज मिश्रा ने मिट्टी की क्षमता पर प्रकाश डाला

डीन एडमिन डॉ एसआर रथ ने भी खरपतवार से होने वाले नुकसान का जिक्र किया. डीन एकेडमिक डॉ मनोज मिश्रा ने मिट्टी की क्षमता और इसे उर्वर बनाने पर प्रकाश डाला. सहायक प्राध्यापिका प्रतिभा हेंब्रम, प्रभात किरण सहित अन्य ने भी अपने अपने विचार रखे. तकनीकी सत्र के दौरान विद्यार्थियों की ओर से मृदा एवं इसके स्वास्थ्य को लेकर कई सवाल भी पूछे गए, जिसे मुख्य अतिथि डॉ शिवमंगल प्रसाद ने बारी-बारी से सभी के जवाब दिए. मौके पर जिले के प्रगतिशील कृषक श्रीराम प्रसाद ने भी अपने अनुभव साझा किए जबकि जेन्फार्म के अधिकारी प्रवीण शर्मा ने आईसेक्ट विश्वविद्यालय की इस पहल को सराहनीय बताया. संचालन सहायक प्राध्यापिका फरहीन सिद्दीकी व धन्यवाद ज्ञापन कृषि विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सत्यप्रकाश ने किया. इसे भी पढ़ें - अलकायदा">https://lagatar.in/al-qaeda-suspected-terrorist-dr-ishtiaqs-connection-with-land-scam-accused/">अलकायदा

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