NewDelhi : रिटायरमेंट के बाद न्यायाधीशों के पद ग्रहण करने पर रोक लगनी चाहिए. जज सरकार को फायदा पहुंचाते हैं इसके बदले में उन्हें बड़ी मदद दी जाती है, उन्हें पुरस्कृत किया जाता है. जस्टिस नजीर को राज्यपाल बनाया जाने का मामला ऐसा ही है. सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे से कोच्चि में आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही. उनसे सेवानिवृत्ति के बाद सार्वजनिक पद ग्रहण करने वाले न्यायाधीशों के बारे में उनकी राय पूछी गयी थी. अधिवक्ता दुष्यंत दवे एर्नाकुलम गवर्नमेंट लॉ कॉलेज ओल्ड स्टूडेंट्स एंड टीचर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में Basic Structure Of Indian Constitution And The Present Day Challenges विषय पर बोल रहे थे.
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भुट्टो ने माना, संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे के केंद्र में कश्मीर मुद्दा लाना है मुश्किल पिछले कुछ वर्षों में न्यायपालिका ने हमें निराश किया है?
दुष्यंत दवे से पूछा गया कि क्या उन्हें नहीं लगता कि पिछले कुछ वर्षों में न्यायपालिका ने हमें निराश किया है? दवे ने अपने जवाब में कहा, सीजेआई गोगोई के कार्यकाल में राफेल, अयोध्या, सीबीआई समेत कई मामलों में सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया गया. ऐसा यौन उत्पीड़न के आरोपों को छिपाने के लिए किया गया. इससे नागरिक काफी प्रभावित हुए हैं. इस क्रम में कहा कि CJI गोगोई, CJI बोबडे, CJI रमना के शासन ने निराश किया है. बता दें कि भारत के पूर्व CJI रंजन गोगोई पर मीटू मूवमेंट के दौरान यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था.
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महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल की आपबीती, पापा ने मेरा यौन शोषण किया… निश्चित वैचारिक झुकाव वाले जजों को आगे किया जा रहा है
कॉलेजियम सिस्टम सहित न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए कैसी व्यवस्था स्थापित हो, इस पर श्री दवे ने कहा, आज के भारत में इस सवाल का जवाब मुश्किल है. हमने अपना नैतिक फाइबर खो दिया है ऐसे लोगों को पावर में लाना मुश्किल है जो वास्तव में स्वतंत्र हैं आज जिस तरह के न्यायाधीशों का चयन किया जा रहा है, वे एक निश्चित वैचारिक झुकाव वाले हैं.
कॉलेजियम के सदस्य स्वयं कुछ राजनीतिक विचारधाराओं से प्रभावित होते हैं
दवे ने कहा, कॉलेजियम के सदस्य स्वयं कुछ राजनीतिक विचारधाराओं से प्रभावित होते हैं. पूछा गया कि आजकल जब न्यायपालिका किसी मामले में हस्तक्षेप करती है, तो ज्यूडिशियल एक्टिविज्म की बात कह उसकी आलोचना की जाती है इसका मुकाबला करने के लिए क्या किया जा सकता है?” दवे का जवाब था, राजनीतिक वर्ग न्यायपालिका से नफरत करता है. कहा कि उदाहरण के लिए विशाखा फैसले को लें, इसने कार्यालयों में महिलाओं के उत्पीड़न को संबोधित किया. संसद तब तक कोई कानून पारित नहीं कर सकती थी. मीडिया भी खामोश है लेकिन उन्हें रहने दो. मुझे विश्वास है कि न्यायपालिका अच्छा काम करती रहेगी. [wpse_comments_template]
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