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क्या कहते हैं घंटी आधारित प्राध्यापक
प्राध्यापक चंद्रशेखर राय ने बताया कि विगत चार वर्षों से हम सेवा देते आ रहे हैं. हमें प्रति घंटी (पीरियड) कक्षा लेने पर 600 रुपये एवं अधिकतम 36000 रुपये मिलते हैं. जब हमलोग एक प्राध्यापक के सभी दायित्व का निर्वहन करते हैं तो हमारी भी एक सम्मानजनक एवं स्थायी प्रतिनियुक्ति होनी चाहिये. यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यू जी सी) रेगुलेशन के अनुसार हमें वेतनमान सहित अन्य प्रावधान लागू होने चाहिए. इसे भी पढ़ें : पटमदा">https://lagatar.in/patmada-distribution-of-thirty-lakhs-among-53-farmers-of-patamda/">पटमदा: पटमदा के 53 किसानों के बीच तीस लाख की राशि वितरित
हमारी दो मुख्य मांगें हैं : डॉ. अर्जुन कुमार
डॉ. अर्जुन कुमार ने कहा कि हमारी दो मुख्य मांगें हैं पहली मांग है कि महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति के समय पारा शिक्षकों के तर्ज पर 50 प्रतिशत नियुक्ति हम घंटी आधारित शिक्षकों की होनी चाहिये. दूसरी मांग यह है कि घंटी आधारित शिक्षक के स्थान पर हमलोगों को सहायक प्राध्यापक (अनुबंधित) नामकरण किया जाय. कारण हम सभी उच्च शिक्षा प्राप्त हैं तथा महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं. घंटी आधारित शिक्षक कहा जाना कहीं से भी सम्मानजनक संबोधन नहीं लगता. इसे भी पढ़ें :नियुक्ति को लेकर शंका बनी रहती है : जनमेजय महतो
जनमेजय महतो ने कहा हमें जिस स्थिति में रखा गया है उससे हमेशा अपनी नियुक्ति को लेकर शंका बनी रहती है. हम पठन-पाठन सहित अन्य सभी प्रकार के कार्य निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करते हैं. प्रतिनियुक्ति हेतु निर्धारित मानदंडों को पूर्ण करने के बाद ही हमलोगों की प्रतिनियुक्ति हुई है. इसके बावजूद इस मंहगाई के दौर में हमें मिलनी वाली राशि पर एवं नियुक्ति पर भी गम्भीरता के साथ विचार किया जाना चाहिये. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-ayushman-card-will-be-made-soon-for-the-left-out-beneficiaries-of-sabar-and-other-primitive-tribes-of-the-district/">जमशेदपुर: जिले के सबर एवं अन्य आदिम जनजातियों के छुटे हुए लाभुकों का जल्द बनेगा आयुष्मान कार्ड

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