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सरायकेला: प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभुकों पर बालू की मंहगाई की मार

Seraikela (Bhagya Sagar Singh):  सरायकेला-खरसावां जिले में बालू को लेकर कुछ वर्षों से प्रत्यक्ष एवं पर्दे के पीछे से चल रहे घटनाक्रम इतिहास के पन्नों में लिखे जाने योग्य होते जा रहे हैं. बालू की मार से किसी का व्यवसाय गया तो किसी की राजनैतिक कैरियर, तो कहीं शक के दायरे में अधिकारी भी आए. बालू घाट बंदोबस्ती न होने से सैकड़ों ट्रैक्टर एवं हाइवा संचालकों का कारोबार भी ठप हुआ. मौजूदा समय में सरायकेला सदर प्रखंड के प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभुक भी बालू त्रासदी से परेशान हैं. इसे भी पढ़ें: चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-electricity-problems-were-fixed-in-the-dialysis-center-of-sadar-hospital/">चाईबासा

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2021-22 में स्वीकृत 2335 आवासों में 948 ही पूरे हुए

विगत दिनों प्रखण्ड विकास पदाधिकारी द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यप्रगति की समीक्षा बैठक रखी गई थी. जिसमें यह आंकड़ा सामने आया कि वर्ष 2021-22 में स्वीकृत 2335 आवासों में 948 ही पूर्ण हुए हैं. बचे 1387 लाभुक में अधिकतर आज बालू की किल्लत एवं महगाई की मार से परेशान हैं. अधिकतर लाभुकों का कहना है कि मंहगी बालू मिल भी जाए तो खरीद कर घर बनाना मुश्किल है.

बालू की क्वालिटी एवं क्वांटिटी की जांच भी ग्राहक नहीं कर सकते

एक ट्रैक्टर ट्रॉली में लगभग 100 घनफिट बालू रहती है जो डेढ़ से दो हजार में मिला करते थे. अब बालू तो सार्वजनिक मिलना बंद हो गया है, कालाबाजार में जो बालू मिल रहे हैं उसकी कीमत से 100 घनफिट की 6000 रुपये हो गई है. उसमें भी रिस्क यह है कि रात के अंधेरे में मिलने वाले इस बालू की क्वालिटी एवं क्वांटिटी की जांच भी ग्राहक नहीं कर सकते. पहले भुगतान करने के बाद ही कालाबाजारी की वस्तुएं मिलती हैं.

बालू के उठाव एवं परिवहन पर प्रतिबंध के बाद कालाबाजारी तेज

100 घनफिट बालू की कीमत कैसे 6000 हुई इस विषय पर जानकारी लेने पर पता चला कि प्रशासन द्वारा अवैध तरीके से बालू के उठाव एवं परिवहन पर प्रतिबंध लगाए जाने से लोकल बालू नहीं मिल रहा है. इस किल्लत को भुनाने में सफेदपोश कालाबाजारी सक्रिय हो गए हैं. रात के अंधेरे में कुछ हाइवा अज्ञात स्थान से बालू लेकर पहुंचते हैं. उसी बालू को रातोंरात जरूरतमंदों के यहां अन्य वाहनों के माध्यम पहुंचा दिया जाता है. यही कारण है कि कालाबाजार में बालू खरीद कर निर्माण कार्य कराना हर किसी के लिये असम्भव हो गया है. इसे भी पढ़ें: रांची">https://lagatar.in/ranchi-violence-pil-high-court-asked-why-ssp-was-removed-amid-investigation-directed-dgp-and-home-secretary-to-file-affidavit/">रांची

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