Seraikela (Bhagya Sagar Singh) : जिले में इस वर्ष
मॉनसून की बेरुखी का दंश किसान सहित मछली पालकों को भी झेलना पड़ रहा
है. ऐसा नहीं है कि बारिश हुआ ही न हो, कृषि विभाग से वर्षा की प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जुलाई महीने में अब तक 934.8 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गयी
है. प्रखंडवार वर्षा सरायकेला 98.8, खरसावां 152.2,
कुचाई 145.2, गम्हरिया 89.6, राजनगर 66.4, चांडिल 99.2, नीमडीह 107.2,
ईचागढ़ 101.0 एवं
कुकडु प्रखण्ड में 75.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गयी
है. जिले के नौ प्रखंडों में सबसे अधिक खरसावां प्रखण्ड में 152.2 एवं सबसे कम राजनगर प्रखण्ड में 66.4 मिलीमीटर बारिश हुई
है. [caption id="attachment_363706" align="aligncenter" width="600"]

https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/Saraikela-Irregation-1.jpg"
alt="" width="600" height="400" data-wp-editing="1" /> पम्प द्वारा खेत में पानी भर कर खेतों में हल चलाते किसान.[/caption]
इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-more-prisoners-than-capacity-in-mandal-jail-capacity-of-620-prisoners-more-than-800-prisoners-are-locked/">चाईबासा
: मंडल कारा में क्षमता से अधिक कैदी, क्षमता 620 कैदियों की, बंद हैं 800 से अधिक कैदी सावन के महिने में भी पानी पम्प का हो रहा उपयोग
किसानों के अनुसार जिस सावन महीने में नदी, तालाब एवं पोखर पानी से लबालब भरे होते
हैं. पानी संतुलन हेतु खेत के
मुहाने जल निकासी हेतु खोले रहते
हैं. इस वर्ष वैसे अनेक खेतों को
पम्प चला कर अगल-बगल के गड्ढों में जमे पानी से भरा जा रहा
है. ताकि बारिश होने तक खेत के धान एवं चारा को किसी तरह सुरक्षित रखा जा सके.
बारिश की असमानता से सशंकित हैं किसान
किसानों के अनुसार इस वर्ष की बारिश भी लॉटरी आधारित हो रही
है. एक गांव में बारिश होती है तो चार पांच किलोमीटर बगल के गांव में पानी की एक बूंद नहीं पड़ रही
है. जिस किसान को प्रकृति प्रदत्त वर्षा रूपी लॉटरी की
नम्बर लगी वो खुश, अन्य
किसानो में मायूसी
है. उल्लेखनीय है कि सरायकेला क्षेत्र के लगभग 98 प्रतिशत किसान प्रकृति के भरोसे ही खेती करते
हैं. सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था किसानों के पास नहीं के बराबर
है. लगभग दो प्रतिशत किसानों के पास ही तालाब या डीप बोरिंग जैसी व्यवस्था है, लेकिन तालाब में भी इस बार पानी नहीं
हैं. वर्षा नहीं होने से किसानों के साथ-साथ मछली पालक भी परेशान
हैं. [wpse_comments_template]
Leave a Comment