alt="" width="360" height="504" /> बाहुड़ा रथ यात्रा की कलाकार द्वारा बनाई कई तस्वीर.[/caption] इसे भी पढ़ें : किरीबुरु">https://lagatar.in/kiriburu-painting-competition-organized-in-karamada-upgraded-middle-school-the-elixir-of-independence/">किरीबुरु
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सरायकेला में दो दिनों का सफर तय कर श्रीमंदिर पहुंचेंगे प्रभु जगन्नाथ
[caption id="attachment_352703" align="aligncenter" width="350"]alt="" width="350" height="250" /> सरायकेला में पूजा अर्चना शुरू.[/caption] सरायकेला में दो दिनों का सफर तय कर प्रभु जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र व देवी सुभद्रा के श्रीमंदिर पहुंचेंगे. सरायकेला में प्रभु जगन्नाथ को गुंडिचा मंदिर से श्रीमंदिर पहुंचने में दो दिन का समय लगता है. सरायकेला में प्रभु जगन्नाथ शनिवार की रात रास्ते में ही रथ पर रात्रि विश्राम करेंगे. रविवार को देर शाम यहां जगन्नाथ मंदिर में पहुंचेंगे. दूसरी ओर शनिवार को गुंडिचा मंदिर में प्रभु जगन्नाथ के पूजा के लिये सुबह से ही भक्तों की भीड़ जुटी रही. बड़ी संख्या में भक्तों ने गुंडिचा मंदिर में पहुंच कर पूजा अर्चना की. [caption id="attachment_352704" align="aligncenter" width="360"]
alt="" width="360" height="504" /> पूजा अर्चना की तैयारी करती महिलाएं.[/caption] इसे भी पढ़ें : किरीबुरु">https://lagatar.in/kiriburu-new-camp-resident-meghahatuburu-troubled-by-unemployment-for-three-years-attempted-suicide/">किरीबुरु
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खरसावां, हरिभंजा में देर शाम गुंडिचा मंदिर पहुंचेंगे प्रभु जगन्नाथ
alt="" width="360" height="180" /> खरसावां, हरिभंजा, दलाईकेला, संतारी, पोटोबेड़ा, कुचाई के बंदोलौहर व गालुडीह, चांडिल, सीनी समेत अधिकांश स्थानों पर एक दिन का सफर तय कर प्रभु जगन्नाथ गुंडिचा मंदिर से श्रीमंदिर पहुंचेंगे. शनिवार की शाम प्रभु जगन्नाथ की बाहुड़ा रथ यात्रा निकलेगी. भक्त प्रभु जगन्नाथ के रथ को खींचते हुए गुंडिचा मंदिर से श्रीमंदिर तक पहुंचायेंगे. प्रभु जगन्नाथ के गुंडिचा मंदिर से श्रीमंदिर वापस लौटने के साथ ही इस वर्ष का रथ यात्र संपन्न हो जायेगा. इसे भी पढ़ें : एलन">https://lagatar.in/elon-musk-cancels-twitter-deal-will-pay-a-1-billion-penalty-to-the-company/">एलन
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पुरी की तर्ज पर हरिभंजा में निभायी जायेगी ‘छप्पन भोग’ व ‘अधरपोणा’ की रस्म
[caption id="attachment_352708" align="aligncenter" width="360"]alt="" width="360" height="180" /> खरसावां गुंडिचा मंदिर के सामने खड़ा प्रभु का रथ.[/caption] खरसावां के हरिभंजा में बाहुड़ा रथ यात्रा के दौरान सभी धार्मिक रस्मों को ओड़िशा के पुरी की तर्ज पर निभाया जायेगा. यहां गुंडिचा मंदिर से श्रीमंदिर के लिए निकलने के दौरान चतुर्था मूर्ति (प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा व सुदर्शन) की आरती उतारी जायेगी. फिर ‘पोड़ पीठा’ का भोग लगाया जायेगा. इसके बाद भक्त प्रभु जगन्नाथ के रथ को खींच कर मंदिर के मुख्य द्वार तक पहुंचायेंगे. गुंडिचा मंदिर से वापस श्री मंदिर पहुंचने पर अधरपणा, छप्पन भोग समेत अन्य रस्म भी निभाये जायेंगे. प्रभु को 56 प्रकार के मिष्टान्न भोग लगाये जायेंगे. प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा के श्री मंदिर पहुंचने पर पारंपरिक शंखध्वनि व हुल-हुली के साथ स्वागत किया जायेगा. इसकी तैयारी पूरी कर ली गयी है. [wpse_comments_template]

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